ऊना। स्कूल वाहनों के हादसों का शिकार होने के मामले बीते कुछ वर्षों में काफी बढ़ गए हैं। जब ऐसे दुखद हादसे होते हैं, तो उसके बाद अकसर नियमों की दुहाई दी जाती है और चर्चाएं होती है कि अगर समय रहते नियमों का पालन किया गया होता तो ऐसा न होता। लेकिन सड़कों पर सुबह और शाम के समय सरपट दौड़ते स्कूल वाहनों की निगरानी करने वाला कोई नजर नहीं आता। दुखद हादसों के बाद अधिकारी कुछ दिन चालान पर जोर देते हैं और फिर पुरानी स्थिति लौट आती है। ऐसी ही स्थिति ऊना में नजर आती है।
जानकारी के अनुसार शहर से सटे बड़े निजी स्कूलों के वाहनों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। टक्का सड़क मार्ग पर स्थित क्षेत्र के प्रसिद्ध स्कूल के वाहन में विद्यार्थी अपनी मर्जी से कहीं भी बैठ रहे हैं। शुक्रवार को छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने जा रही बस में बच्चे स्कूल बस के शीशे के बिल्कुल पास बैठे नजर आए। चालक की सीट भी उनसे पीछे नजर आ रही थी। बच्चे बस के बोनट के बिल्कुल करीब थे, जबकि कायदे से उन्हें सीटों पर सुरक्षित तरीके से बैठाया जाना चाहिए। इसके अलावा बस में विद्यार्थी ठूस-ठूस कर भरे जा रहे हैं।
इस तरह हरोली क्षेत्र के पंडोगा गांव में स्थित प्रसिद्ध निजी संस्थान की स्कूल बस में लापरवाही इस कदर है कि मानिए नियम उसके लिए बने ही नहीं। हैरानी की बात है कि इस स्कूल की बस की इंश्योरेंस पांच साल पहले यानी साल 2019 में खत्म हो चुकी है और अब तक इसे बच्चों को लाने और छोड़ने के लिए खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बस प्रतिदिन 100 से अधिक बच्चों को स्कूल पहुंचाती है, जबकि इसके दस्तावेज कई साल पहले खत्म हो चुके हैं।
निरीक्षणों से मात्र खानापूर्ति
उधर शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर निजी स्कूलों में जाकर मानकों की जांच की जाती है, लेकिन हैरत है कि पांच साल से बिना इंश्योरेंस चल रही बस पर किसी का ध्यान नहीं गया। वहीं, हादसों के कुछ दिन बाद से वैसे भी स्कूली वाहनों पर कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आती। वहीं, निजी स्कूलों की मोटी फीस चुकाने वाले अभिभावक भी इन अनियमितताओं का विरोध नहीं करते। बता दें कि कुछ माह पहले बंगाणा क्षेत्र में स्कूली वाहन से गिरकर एक छात्रा की मौत हो गई थी। वहीं, पंजावर गांव में भी निजी बस से उतरते समय एक छात्र की मौत हो गई थी।
Iनिजी स्कूलों के निरीक्षण को लेकर जल्द अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, बीते कुछ समय से सरकारी स्कूलों में निरीक्षण का क्रम लगातार जारी रहा था। अगर स्कूली वाहनों में नियमों से जुड़ा कोई उल्लंघन होता है, तो निश्चित तौर पर उसके खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। इस बारे में परिवहन अधिकारियों के साथ भी चर्चा की जाएगी। I
राजेंद्र कौशल, उपनिदेशक, जिला उच्च शिक्षा विभाग