गगरेट उपमंडल में शिक्षण संस्थान की ओर से साइन बोर्ड पर टांगा गया होर्डिंग।
घनारी (ऊना)। गगरेट उपमंडल में निजी शिक्षण संस्थानों की कथनी और करनी के बीच का फर्क अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करने वाले ये संस्थान खुद को कोई नेशनल तो कोई इंटरनेशनल स्तर का बताकर आधुनिक शिक्षा और अनुशासन की लंबी-चौड़ी बातें करते नहीं थकते। हकीकत यह है कि इनके विज्ञापन अब सड़कों के किनारे सरकारी साइन बोर्डों से लटकते नजर आ रहे हैं। विडंबना देखिए कि जिन साइन बोर्डों को सड़क सुरक्षा और दिशा-निर्देश के लिए लगाया गया है, वही अब निजी संस्थानों की सस्ती पब्लिसिटी का जरिया बन चुके हैं। शिक्षा और अनुशासन का पाठ पढ़ाने का दावा करने वाले ये संस्थान खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाने में पीछे नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन संस्थानों को सरकारी संपत्ति पर इस तरह विज्ञापन टांगने की खुली छूट मिल गई है? अगर नहीं, तो फिर संबंधित विभाग और उसके जिम्मेदार अधिकारी आखिर आंखें क्यों मूंदे बैठे हैं? क्या सरकारी साइन बोर्ड अब निजी संस्थानों के प्रचार के लिए ही लगाए जा रहे हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन ही नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति का खुला दुरुपयोग भी है। इसके बावजूद न तो कोई चेतावनी दी जा रही है और न ही कोई कार्रवाई होती नजर आ रही है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ई. हरगोबिंद सिंह ने कहा कि ऐसे निजी शिक्षण संस्थानों को नोटिस जारी किए जाएंगे और नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।