खास खबर
बीते दो साल में 600 रुपये से ऊपर चले थे पशुचारे के दाम
इस बार दामों में कमी से पशुपालकों में खरीद की होड़
पशुओं के चारे के संकट में जमकर होता है तूड़ी का इस्तेमाल
विकास चौधरी
ऊना। जिले के पशुपालकों के लिए गेहूं की कटाई राहत लेकर आई है। इस बार तूड़ी के भाव 300 से 450 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं। बीते कुछ साल के मुकाबले इस बार तूड़ी के भाव कम हैं। ऐसे में पशुपालकों ने समय रहते तूड़ी की खरीद शुरू कर दी है। बताया जा रहा कि इस बार तूड़ी खरीदने को लेकर पशुपालकों में अधिक होड़ नहीं है। इसका सीधा असर कीमत पर पड़ा। दो वर्ष पहले दिसंबर में तूड़ी के भाव 1000 रुपये प्रति क्विंटल पार कर गए थे। इससे पशुपालकों को खासी मुश्किल हुई और आर्थिक नुकसान उठाना पड़। लोगों को महंगे दाम पर पड़ोसी राज्य पंजाब से तूड़ी की खरीद करनी पड़ी। उसके बाद पशुपालकों ने गेहूं की कटाई के समय ही सालभर की तूड़ी खरीदकर रखने की योजना बनाई। ताकि दिसंबर से लेकर मार्च के बीच उन्हें तूड़ी की आवश्यकता न पड़े। बीते साल बेहद कम पशुपालकों ने सर्दी के मौसम में तूड़ी की खरीद की। इसका असर मौजूदा दामों पर भी दिख रहा है। खेत से तूड़ी खरीदकर उठाने पर 300 से 350 रुपये प्रति क्विंटल दाम हैं। तूड़ी को पशुपालकों के घर द्वार पहुंचाने पर 450 रुपये तक लिए जा रहे। पशुपालक रविंद्र कुमार, राजीव, लखविंद्र सिंह, शुभम सैनी, ममता देवी, ओंकारी देवी ने कहा कि तूड़ी पशुओं का मुख्य चारा है। हरा घास और अन्य पौष्टिक तत्व मिलाकर तूड़ी पशुओं को खिलाई जाती है। कहा कि उनका प्रयास रहता है कि गेहूं की कटाई के समय ही सालभर की तूड़ी की व्यवस्था कर लें ताकि बाद में इसकी जरूरत न पड़े। अगर दिसंबर से मार्च के बीच तूड़ी खरीदें तो दाम दोगुने लिए जाते हैं। उपनिदेशक जिला पशुपालन विभाग डॉ. विनय शर्मा ने बताया कि तूड़ी के दामों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है। कभी दाम अधिक तो कभी कम होते हैं। कहा कि पशुओं का यह अहम चारा है और इसके दाम तय करने के प्रयास जारी हैं।