ऊना। जिला ऊना के अधिकतर क्षेत्रों में बारिश जहां एक ओर किसानों के लिए वरदान साबित हुई है, तो वहीं दूसरी ओर बारिश कहीं किसानों के लिए आफत भी बनी है। इस सीजन की बारिश आलू की फसल के लिए वरदान साबित हुई है।
गौर हो कि 60 से 70 दिन में आलू की फसल इस सीजन में जहां गैरसंचित इलाकों में ऊना जिला के किसान सिंचाई करके आलू की पैदावार करने में डटे हुए हैं। उन्हें बारिश होने से काफी हद तक राहत मिली है। कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक डॉक्टर कुलभूषण धीमान के अनुसार ऊना जिले में खरीफ के सीजन में आलू की बिजाई 60 से 70 दिन के लिए की जाती है और यह 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में किसान आलू की बिजाई करते हैं और इस सीजन में आलू की फसल के लिए बारिश बेहद जरूरी होती है।
ऊना जिले के सदर ऊना, हरोली गगरेट अंब व बंगाणा के कुछ हिस्से में किसानों के द्वारा आलू की बिजाई इस सीजन में की जाती है। रेतीली जमीन होने की सूरत में पानी ज्यादा समय तक खेतों में जमा नहीं हो पता है, लेकिन अगर बारिश ज्यादा होती है और आलू का बीज मिट्टी छोड़ देता है, तो इससे किसानों को काफी दिक्क्तें पेश आती हैं, जिससे फसल को नुकसान होता है। वहीं, दूसरी ओर ऊना जिले के तकरीबन 32000 हेक्टेयर एरिया में मक्की की बिजाई की जाती है, तो 1500 से लेकर 1600 हेक्टेयर एरिया में किसान आलू की पैदावार करते हैं।