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Una News: कृषि और पशुपालन से आर्थिकी को सुदृढ़ बना रहे लोअर बढे़ड़ा के रघुवीर सिंह

Mon, 01 Jul 2024 03:08 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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उपनिदेशक कृषि ऊना कुलभूषण धीमान ऊना में किसान के खेत में जा कर लगी सब्जी के पौधों का निरिक्षण क
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ऊना। जिला के लोअर बढे़ड़ा निवासी 50 वर्षीय रघुवीर सिंह के लिए कृषि व पशुपालन आर्थिकी का अहम जरिया बना है। अर्धसैन्य बल सीआरपीएफ में लगभग 22 वर्षों तक देश सेवा करने के उपरान्त रघुवीर सिंह ने अपनी पुश्तैनी जमीन को संभाला तथा कृषि के साथ-साथ पशुपालन को भी आर्थिकी का आधार बनाया। वर्ष 2016 में सीआरपीएफ से सेवानिवृत्ति लेने के उपरांत पिछले लगभग छह से सात वर्षों के दौरान वे समय-समय पर सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि व पशुपालन विकास योजनाओं के साथ जुड़ते हुए आज वे एक प्रगतिशील किसान की दिशा में आगे बढ़े हैं। रघुवीर सिंह ने बताया कि सबसे पहले वे कृषि विभाग की जाइका परियोजना से जुड़े तथा कृषि की नई तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। साथ ही मिश्रित खेती की दिशा में भी कदम आगे बढ़ाए। उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में मिश्रित खेती कर रहे हैं, जिसमें मक्की, गेहूं, आलू, गन्ना के साथ विभिन्न सब्जियों का भी उत्पादन शामिल है।
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मक्की की अग्रिम फसल के मिल रहे अच्छे दाम



उन्होंने बताया कि अन्य किसानों के साथ मक्की की अग्रिम तैयार होने वाली फसल को बीजा है। अग्रिम मक्की का बीजारोपण तीन चरणों में किया है, जिसमें पहला चरण मार्च, दूसरा अप्रैल तथा तीसरा मई में शामिल है। उन्होंने बताया कि पहले चरण की कटाई जून माह में की जा रही है, जबकि दूसरे चरण की कटाई जुलाई तथा तीसरा चरण अगस्त माह में पूरा होगा। समय से पूर्व मक्की तैयार होने से जहां बाजार में अच्छा दाम मिल रहा है, तो वहीं उत्पादन क्षमता में भी वद्धि हुई है।

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मिश्रित खेती से वर्ष भर प्राप्त होती है आय



रघुवीर सिंह ने कहा कि खेतीबाड़ी से उन्हें प्रति वर्ष औसतन लगभग पांच से छह लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि मिश्रित खेती के चलते उन्हें वर्ष भर विभिन्न फसलों से आय प्राप्त होती रहती है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के माध्यम से उन्हें उन्नत खेती के बारे में प्रशिक्षण भी मिला है। इसके अलावा जाइका परियोजना के माध्यम से भी मिश्रित खेती के बारे में आवश्यक प्रशिक्षण हासिल किया है। उन्होंने बताया कि वे कृषि के साथ पशुपालन भी कर रहे हैं। उन्होंने गाय व भैंसें भी पाल रखी है, जिनसे प्राप्त होने वाले दुग्ध उत्पादों से भी उन्हें औसतन प्रतिवर्ष दो से अढ़ाई लाख रुपये की आमदन हो रही है। इसके अलावा पशुओं के गोबर से वे प्राकृतिक खाद भी तैयार कर रहे हैं।
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कोट्स



उपनिदेशक कृषि ऊना कुलभूषण धीमान ने बताया कि लोअर बढे़ड़ा निवासी रघुवीर सिंह मक्की की अग्रिम फसल से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। इसके अलावा वह पिछले काफी समय से जापान वित पोषित जाइका परियोजना से भी जुड़े हैं तथा मिश्रित खेती अपनाकर आय के अतिरिक्त स्रोत सृजित कर रहे हैं।

उपनिदेशक कृषि ऊना कुलभूषण धीमान ऊना में किसान के खेत में जा कर लगी सब्जी के पौधों का निरिक्षण क

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