जिला का तापमान 35 डिग्री के आसपास, कई खेतों में बीज सड़ने लगा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में लगातार पड़ रही तेज धूप से जहां लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो चुका है, तो वहीं फसलों पर भी संकट गहराता जा रहा है। वर्तमान में किसान मुख्यतः आलू की फसल पर काम कर रहे हैं।
इस फसल की बिजाई अभी शत-प्रतिशत पूरी होनी है। इस बीच सिंचाई की आवश्यकता शुरू हो चुकी है। किसानों को बड़े खेतों में दिनभर सिंचाई में जुटना पड़ रहा है। कई जगह तो मजदूरों से सिंचाई करवानी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार इस समय जिला का अधिकतम तापमान 35 डिग्री के आसपास चल रहा है। बीते वीरवार को दिनभर बादल छाए रहे और बारिश की आस जग गई, लेकिन हल्की बूंदाबांदी के अलावा कुछ हाथ न लगा। इसके बाद शुक्रवार सुबह को खिली तेज धूप दिनभर बनी रही। ऐसे में किसानों के पास आलू की फसल को लेकर सिंचाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
किसान विनोद कुमार, सुनील, राहुल कुमार, अजयपाल, जतिंद्र सैनी ने बताया कि आलू की दो माह वाली फसल सर्द मौसम में तेजी से विकसित होती है। यही वजह है कि इसे सर्दी आगमन के माह सितंबर में लगाया जाता है। रात से समय सर्दी का अहसास होने लगा है, लेकिन दिन में अभी मौसम की गरमाहट बरकरार है। खासकर दोपहर को तेज धूप में आलू का बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में सिंचाई ही एकमात्र विकल्प है। इसके लिए 500 से 600 रुपये दिहाड़ी पर मजदूरों को भी लगाना पड़ रहा है।
ध्यान रहे कि जिला में 2500 से 3000 हेक्टेयर तक आलू की दो माह वाली फसल तैयार हो रही है। बड़ी मंडियों में ऊना के आलू की भारी मांग रहती है। कई किसानों की आर्थिकी बेहतर करने में इस फसल की अहम भूमिका रही है। यही कारण है कि किसानों में यह अधिक प्रचलित है।
कोट्स
आलू की फसल सर्दी के मौसम में अच्छे तरीके से तैयार होती है। गर्मी के मौसम में इस फसल को बचाकर रखना चुनौती से कम नहीं। वर्तमान में दोपहर के समय मौसम अधिक गर्म है, जिससे फसल को खतरा हो सकता है। जमीन अधिक गर्म होने पर सिंचाई भी सोच समझकर करनी चाहिए। हालांकि जिला के किसान इस फसल से जुड़ी चुनौतियों से पार पाने में परिपक्व हैं, लेकिन मौसम की विपरीत परिस्थितियों में नुकसान की आशंका बनी रहती है।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग