कचरे का पहाड़ पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी, वन विभाग बना मूकदर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी मुबारिकपुर (ऊना)। कहने को तो समय-समय पर वनों के संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही स्थिति बयां कर रही है। अंब उपमंडल के चिंतपूर्णी मंदिर न्यास द्वारा क्षेत्र के हरे-भरे बधमाना जंगल में कई सालों से चिंतपूर्णी कस्बे के पॉलीथीन युक्त कचरे को खुले में फेंका जा रहा है।
इस क्षेत्र से गुजरने वाली भद्रकाली से चिंतपूर्णी सड़क के आसपास दुर्गन्धयुक्त वातावरण का कारण बनता है। इस सड़क से गुजरने वाले पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व राहगीरों राम चंद, सुरेश कुमार, सुखविंदर सिंह, दीपक, जीवन ने क्षेत्र में पॉलिथीन युक्त कचरा फेंकने को हरी-भरी वन संपदा के लिए भविष्य में खतरा होने पर चिंता जताई है।
बता दें कि इस स्थान दस वर्ष पूर्व लगा एक साईन बोर्ड दर्शाता है कि दिसंबर 2014 से फरवरी 2015 के लिए मंदिर चिंतपूर्णी, राज्य टूरिज्म के सहयोग से वेस्ट कचरा प्रबंधन चिंतपूर्णी क्षेत्र के कचरे को फेंकने के लिए इस क्षेत्र को ले रखा था। लेकिन उसके बाद ऐसी कोई व्यवस्था भविष्य में दूर तक नहीं दिखी। हालांकि, उसके बाद भी इस क्षेत्र में अब तक कचरा फेंकने का सिलसिला ज्यों का त्यों जारी है। पर्यावरण नियमों की उल्लंघना के साथ-साथ कचरा प्रबंधन को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। वहीं, वन विभाग का इस बारे मूकदर्शक बना रहना वनों के संरक्षण व पर्यावरण से जुड़े दावों को धरातल पर धराशायी कर रहा है।
फोटो- बधमाना के हरे-भरे वन क्षेत्र में फेंके गए कचरे से बना पॉलिथीनयुक्त कचरे का पहाड़।