मैहतपुर में आगजनी की घटना ने खड़े किए कई सवाल
पंजीकरण रद्द होने पर भी कब्जा नहीं ले पाया उद्योग विभाग
पांच साल पहले भी इसी उद्योग में हुई थी आगजनी की घटना
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। औद्योगिक क्षेत्र मैहतपुर में रविवार मध्यरात्रि को एक उद्योग में अचानक भड़की आग ने जिला प्रशासन के प्रति अनेक सवाल भी सुलगा दिए हैं। उद्योग में लगी आग तो अब ठंडी हो चुकी है, लेकिन आगजनी के बाद सुलगे अनेक सवालों की ज्वाला अभी भी धधक रही है।
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि औद्योगिक क्षेत्र के जिस प्लॉट को कबाड़ के गोदाम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था, उस प्लॉट का पंजीकरण उद्योग विभाग ने रद्द कर रखा था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि प्लॉट का पंजीकरण रद्द होने के बावजूद उक्त प्लॉट को कबाड़ के गोदाम के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति आखिर किसने दे रखी थी। उक्त प्लाट का पंजीकरण रद्द हुए तकरीबन छह महीने हो चुके थे। ऐसे में बिजली कनेक्शन तथा पेयजल कनेक्शन किसकी अनुमति से चल रहे थे। लोहे के कबाड़ तथा विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक के सामान को काटकर उसका दाना तैयार करने की प्रक्रिया से जो प्रदूषण फैलता है, उसे रोकने के लिए प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने आज तक क्यों कोई कदम नहीं उठाया।
पांच साल पूर्व इसी प्लॉट में हुई आगजनी की घटना के बावजूद भी जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के आला अफसरों ने उस घटना से कोई सबक क्यों नहीं लिया। अगर लिया तो उक्त प्लॉट के मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ सियासी दलों के नेता भी कम जिम्मेवार नहीं, जो इस तरह के कार्य पर नकेल कसने की बजाय चंद वोटों के लालच में आम जनता को मुश्किल में डालने से बाज नहीं आते। सोमवार को समूचे क्षेत्र तथा मुख्य बाजार में लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन मिलने के स्थान पर जली हुई प्लास्टिक से उत्पन्न हुई कार्बन मोनोऑक्साइड ही नसीब हुई।
बता देंं कि आगजनी की घटना को रोकने के लिए उक्त कबाड़ गोदाम में किसी प्रकार का कोई बंदोबस्त नहीं पाया गया। हालांकि सीसीटीवी कैमरे तो लगाए गए हैं, परंतु फायर सेफ्टी के लिए कोई प्रबंध नहीं थे।
प्लॉट का पंजीकरण कैंसिल है, कब्जा लेने की पक्रिया लंबी : अंशुल धीमान
इस मामले में उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक अंशुल धीमान ने बताया कि छह माह पूर्व उक्त प्लॉट का पंजीकरण कैंसिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्लॉट का कब्जा लेने की प्रक्रिया काफी लंबी है, जिस कारण कब्जा नहीं लिया जा सका है।
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