जिला भाषा विभाग ऊना की ओर से मनाया गया पहाड़ी दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय ऊना की ओर से शुक्रवार को डीआरडीए सभागार ऊना में पहाड़ी दिवस मनाया गया। साहित्यकारों की ओर से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने की। प्रथम सत्र में पहाड़ी बोली में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन-साहित्यिक कार्यक्रम हुआ। कवियों ने पहाड़ी बोली में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कुंदन भारद्वाज ने क्या होई गिया मेरे म्हाचले, अशोक कालिया ने मेरे दिन तैंह बाहजी न्हेरे न, रामपाल शर्मा घायल ने प्रेम की वो दास्तान अब कहां। कुलदीप शर्मा ने घर आंगन वनवास काटते राम जी, जाहिद अबरोल ने कोई रिश्ता नहीं है फिर भी वो रोज मु-हजयको गुलाब भेजता, प्रकाश चंद महरम ऊनवी ने सुख संतोष पहाड़ों पर है, कृष्ण कुमार लद्दाखी ने खुद शोके खुदा को देखो वो नूरो खाकी बन गया, ओम प्रकाश शर्मा ने भी गुस्से हां तुस्सी वी गुस्से च, संतोष शर्मा ने मंच संचालन के साथ साथ अपनी कविता एक समय था, जज्बा था आसमान को छूने का, डाॅ. बाल कृष्ण सोनी मिजों बड़ी हंसी ओंदी, अनिल कुमार जसवाल ने मोहब्बत का मौसम, रामकिशन भट्टी ने दो दो नयना, रचना रानी ने यह क्या किया हाय क्या किया, सपना जसवाल ने अरमान, ओपी डांग ने मेरे शहर में एक ओर मातम हो गया, राम प्रकाश ने पहाड़ी लोकगीत गंभरी, पुष्पा देवी ने तेरा मेरा प्यार नी अड़िए बचपुना रा, किशोरी लाल बैंस ने ऐसी कविता हो जाए, चरणजीत सिंह चन्नी ने कत्ल दिल का हुआ कविता सुनाई। दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए गए। सिकंदर कुमार एंड पार्टी जलग्रां ऊना के कलाकारों ने पहाड़ी बोली में लोकगीत अम्मा पूछदी, उड़ी जा काले कागा इत्यादि लोकगीतों से मंत्रमुग्ध किया।