हरोली गांव में भेड़- बकरियों में फुट रोट रोग की रोकथाम के लिए सेंपल लेते विभग के कर्मी।स्रोत वि
ऊना। जिले में भेड़ बकरियों में फुट रोट (पैर सड़ना) की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। खासकर हरोली क्षेत्र में इसके कई मामले सामने आए हैं। अभी तक इस बीमारी से जुड़े करीब 50 मामले सामने आए हैं। इसके बाद पशुपालन विभाग भी सतर्क हो गया है। जांच के लिए विशेष तौर पर डीएल लैब मंडी की टीम बुलाई गई है। जांच के बाद भेड़ बकरियों में फुट रोट रोग की समस्या पाई गई है। इसके बाद एहतियात के तौर पर पशुपालन विभाग ने जिले के अन्य हिस्सों में भी भेड़ बकरियों के सैंपल लेने के लिए कमर कस ली है।
जानकारी के अनुसार हरोली गांव में भेड़-बकरियों में फुट रोट रोग का प्रकोप बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। इसकी रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग ने बुधवार को डॉ. विनय शर्मा, उपनिदेशक पशुपालन विभाग ऊना के आदेश पर गांव हरोली में बकरियों और भेड़ों में फैली बीमारी की जांच करने के लिए डीएल लैब मंडी से टीम बुलाई। इसमें डॉ. दीप, दविंद, मुकेश पशु औषधियेजक के साथ शमी जरियाल, चैणू राम, निवासी शाहपुर, जिला कांगड़ा ने भेड़ बकरियों की जांच की। इसमें 300 भेड़ों और 150 बकरियों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया और नमूने लिए। डॉ. दीप ने करीब 50 भेड़ बकरियों में फुट रोट की समस्या बताई। डॉ. दीप ने बताया कि भेड़-बकरियों में ज्यादातर यह बीमारी पेट के कीड़ों और बाहरी प्रजीवियों से होती है।
ध्यान रहे कि फुट रोट एक संक्रामक बीमारी है। इससे भेड़ बकरियों के पैरों में जलन और सड़न पैदा हो जाती है। इससे उनका वजन, दूध और ऊन का उत्पादन कम हो जाता है। प्रजनन क्षमता में कमी आ जाती है। गंभीर रूप से संक्रमित जानवर भोजन के लिए हिलने-डुलने में भी अक्षम हो जाते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त किसानों को आर्थिक तौर पर बहुत नुकसान होता है। बता दें कि इस समय जिले में चंबा, कांगड़ा और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों से गद्दी समुदाय के लोग पहुंचे हुए हैं। ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी होने के कारण वे सर्दी के मौसम में यहां आते हैं और गर्मियों में लौट जाते हैं। पशुपालन विभाग को जैसे ही उनकी भेड़ बकरियों की बीमारी की सूचना मिली, उसके साथ ही जांच टीम को मौके पर बुलाकर उपचार शुरु कर दिया गया।
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डॉ. विनय शर्मा उपनिदेशक पशुपालन विभाग ऊना ने कहा कि जिले में हरोली, बसाल, पनोह, अंब तथा बंगाणा से अगले दो दिनों में कम से कम 100 नमूने लिए जाएंगे। इनकी जांच डीएल मंडी में की जाएगी और जो भी नमूनों का परिणाम निकलेगा। उनके अनुरूप ही इलाज शुरू कर दिया जाएगा। कहा कि ऊपरी क्षेत्रों से आए गद्दी समुदाय की भेड़ बकरियों में यह मामले सामने आ रहे हैं। अनुमान है कि उनके पशु पहले से इस बीमारी से ग्रस्त थे। हालांकि अब उपचार शुरू कर दिया गया है।