ऊना। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के ब्लड बैंक से जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त लेने पर शुल्क वसूलने पर स्वयंसेवी संस्थाओं उग्र होने लगी हैं। संस्थाओं का आरोप है कि वह निशुल्क रूप से ब्लड बैंक में रक्तदान करते हैं, मगर उसी रक्त की मरीज को जरूरत पड़ती है तो उसका शुल्क वसूला जाता है। यह किसी भी सूरत में तर्कसंगत नहीं हैं।
रविवार को एमसी पार्क ऊना में देव भूमि फाउंडेशन से प्रिंस ठाकुर, टीम ऊना ब्लड सर्विस से लविश कपिला, ब्लड लायंस ऊना से संदीप शर्मा, अमन लंबड़, निरंकारी ब्लड सेवा संस्था से मनी, राजकुमार, भूपेंद्र राणा, विकास शर्मा, सोशल एंड सेवर लाइफ क्लब के गणेश नोनू सहित रमन दड़ोच और रक्तदाता निखिल ने पत्रकारवार्ता कर रक्त का शुल्क वसूलने का विरोध जताया है।
संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में ब्लड बैंक है। जरूरत पड़ने पर यहीं से सरकारी या निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त मुहैया करवाया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को रक्त 120 रुपये यूनिट तो निजी अस्पतालों में 1450 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से शुल्क अदा करना पड़ता है। यह कहीं न कहीं बड़ी नाइंसाफी है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को इलाज हिमकेयर कार्ड से होता है, जिसमें ब्लड यूनिटस का खर्च भी शामिल होता है। मगर सच्चाई यह है कि हिमकेयर कार्ड में इलाज करवाने के बावजूद प्राइवेट अस्पताल संचालक मरीजों के तीमारदारों से 1450 रुपये शुल्क वसूलते हैं। संस्थाओं ने कहा कि निजी अस्पताल संचालकों को यह मानवीय आधार पर हिमकेयर कार्ड के खर्च के तहत ही शामिल करना चाहिए, ताकि मरीजों पर इसका बोझ न पड़े।
उन्होंने कहा कि अगर निजी अस्पताल मनमानी करते हैं तो स्वास्थ्य विभाग उनके खिलाफ कार्रवाई करे। वहीं, संस्थाओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से सरकारी व निजी अस्पतालों में मरीजों के लिए रक्त लेने के शुल्क को कम करने की मांग उठाई है। कहा कि जल्द ही उपमुख्यमंत्री से भेंट कर उचित समाधान की मांग की जाएगी।