बंगाणा (ऊना)। बंगाणा की हिमुडा कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं का महासंगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य जगमोहन शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाने की अद्भुत कथा सुनाई। बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ते हुए अपने भक्तों की रक्षा की और गिरधारी लाल के रूप में पूजे जाने लगे। जब ब्रजवासी हर वर्ष इंद्रदेव की पूजा करते थे, तब श्रीकृष्ण ने उनसे प्रश्न किया कि वे इंद्रदेव की आराधना क्यों करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने समझाया कि वर्षा का कारण इंद्रदेव नहीं, बल्कि गोवर्धन पर्वत, गोमाता और प्रकृति हैं। उनके संरक्षण से ही ब्रजभूमि हरी-भरी रहती है। इस बात को मानते हुए ब्रजवासियों ने इंद्रदेव की पूजा बंद कर दी और गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इंद्रदेव को यह बहुत अपमानजनक लगा और उन्होंने क्रोधित होकर मूसलधार बारिश और आंधी-तूफान से ब्रजवासियों को दंडित करने का निर्णय लिया। उनकी आज्ञा से पूरे गोकुल में मूसलधार वर्षा शुरू हो गई, जिससे भयभीत होकर सभी गोप-गोपिकाएं श्रीकृष्ण के पास सहायता मांगने पहुंचे। अपने भक्तों की रक्षा के लिए नन्हें बालक श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया।