कम्युनिटी सेंटर ज्वार में चल रही श्री भक्तमाल कथा के दौरान सुंदर झांकी में सजे नन्हे बच्चे। संव
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जो नश्वर संसार को छोड़कर परमात्मा का आश्रय लेते हैं, उनका जीवन महक उठता है। परम शांति का मार्ग प्रभु का भजन ही है। हमारी सारी चिंताएं समाप्त हो जाएंगी, यदि भगवान के होकर जीने लगें। दुर्बल विचार हमारे सबसे बड़े शत्रु हैं। ये उद्गार भक्त माल कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर अतुल कृष्ण महाराज ने कम्युनिटी सेंटर ज्वार में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति से हम जो चाहते हैं, वही बन सकते हैं। भक्त सदा भगवान के भरोसे रहकर व्यवहार का आनंद उठाता है। जबकि, हरि से विमुख प्राणी अज्ञान की गठरी सिर पर रखकर दुख मनाता है। जो ईश्वर में स्थिर बुद्धि वाले हैं, वे परमार्थ करते हुए संसार के आराध्य बन जाते हैं। ईश्वर में प्रीति न होने के कारण ही मनुष्य परेशान एवं दुखी है। हमारे चित्त पर कुसंस्कारों के आवरण पड़े हैं। इसलिए परमात्म सत्ता का अनुभव नहीं हो पाता। जैसे सूर्य के सामने जब बादल छा जाते हैं तो सूर्य होते हुए भी नहीं दिखता।