ऊना। मौसम में बदलाव आते ही शहर के बाजारों में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन के साथ सर्दियों के आगमन से आईएसबीटी ऊना के आसपास ऊनी परिधानों के स्टॉल भी सजने शुरू हो गए हैं। विशेषकर कुल्लू के आए व्यापारी और दुकानदार सर्दी के मौसम में अपने उत्पादों से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। बाजार में कुल्लवी उत्पाद 200 रुपये से 15,000 रुपये में बिक रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मैदानी इलाकों में पड़ने वाली शुष्क सर्दी से बचाने के लिए उच्च गुणवत्ता के पहाड़ी उत्पादों की खासी मांग रहती है। हाथों से बनाए ऊन के परिधान लोगों में काफी चर्चा में रहते हैं। हर साल की तरह इस बार भी बाजार में कुल्लवी उत्पादों के स्टाल सज गए हैं। इसमें शीप वूल, मैरिनो, अंगोरा, याक बुल और पशमीना से बनी हिमाचली टोपी, मफलर, स्वेटर, कमरी और शॉल सजाए गए हैं।
कुल्लवी उत्पादन बेचने के लिए शहर के रोटरी चौक के पास स्टाल लगाने वाले व्यापारी रंधन कुमार बताते हैं कि ऊना में व्यापार अच्छा रहता है। सीजन में प्रतिदिन 15,000 के आसपास उत्पाद बिकते हैं। खासकर 1,500 से 3,000 तक कीमत वाले उत्पाद अधिक बिकते हैं। पुरुषों की जैकेट और महिलाओं की शॉल की मांग भी काफी रहती है।
यह है उत्पादों की कीमत
हिमाचली टोपी 200 से 500 रुपये, शॉल 600 से 15,000 रुपये, स्टॉल 600 रुपये से 2,000 रुपये, महिलाओं के गर्म सूट 1,800 से 3,500 रुपये, लेडीज जैकेट (कमरी) 700 से 2,000 रुपये और पश्मीना शॉल 12,000 रुपये तक बिक रहा है। वहीं, पुरुषों के लिए मफलर 200 रुपये से 500 रुपये, लोई 1,100 से 3,000 रुपये, स्वेटर 1,800 रुपये, स्वेटर हाफ स्लीव 1,400, पुरुषों के नैरो जैकेट (कमरी) 500 से 3,000 रुपये में बिक रही है।