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Una News: कुटलैहड़ का खैर भारत में कत्था उत्पादन में सबसे बढि़या, बचाना भी बना चुनौती

Mon, 01 Jul 2024 03:16 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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वन मंडलाधिकारी बोले- 13,200 हेक्टेयर से सरकार को एक वर्ष में करोड़ों रुपये की होती इनकम
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क्षेत्र में क्वालिटी और क्वांटिटी में सबसे अच्छा होता है कत्था उत्पादन
राकेश राणा
बंगाणा (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के अधिकतर जंगलों में खैर की अच्छी खासी ब्रीड पाई जाती है। हिमाचल सरकार को जंगलों से अच्छी खासी कमाई होती आ रही है। इसमें चीड़ के पत्तों, चीड़ की लकड़ी, बिरोजा के अलावा दयार की लकड़ी, खैर की लकड़ी घरों में काम आती है।
वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में पाए जाने वाले खैर की ब्रीड में हिमाचल प्रदेश में सबसे बढ़िया अच्छी किस्म के खैर कुटलैहड़ के जंगलों में पाए जाते हैं। वन मंडलाधिकारी ऊना सुशील राणा ने बताया कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले रामगढ़ धार रेंज के तहत पडते ध्यूंसर चौकीमन्यार, थानाकलां सहित अन्य जंगलों में 9700 हेक्टेयर बंगाणा रेंज के तहत आते हैं। इसके अलावा कारू बीट, सोहलासिंगी धार बीट में लगभग 3500 हैक्टेयर में खैर के पेड पाए जाते हैं। इससे हर वर्ष करोड़ों रुपये की इनकम आती है। उन्हाेंने कहा कि इन जंगलों में पाया जाने वाला खैर पूरे भारत वर्ष में सबसे बढ़िया क्वालिटी और क्वांटिटी में कत्था उत्पादन में माना जाता है, इसलिए अवैध कटान माफिया की अकसर इन पेड़ों पर नजर रहती है। कुटलैहड़ के जंगलों में लगभग 13,200 हेक्टेयर के करीब खैर पाया जाता है, जिससे सरकार को एक वर्ष में करोड़ों रुपये की इनकम आती है। क्षेत्र के खैर का कत्था देशभर में सबसे बढि़या माना जाता है। वहीं, बढ़िया खैर उत्पादन होने के साथ-साथ वन विभाग के लिए इसकी सुरक्षा और रक्षा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। इन माफियाओं को पकड़ने के लिए वन विभाग को दो-दो सप्ताह तक जंगलों में पहरा देना पड़ता है, तब जाकर यह लोग पकड़े जाते हैं।
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खास कर अवैध कटान माफिया से जुड़े लोग सर्दियों में ज्यादातर छुप-छुपकर अवैध कटान को अंजाम देते हैं। सर्दियों में अधिक धुंध तथा ठंड होने से इन लोगों को पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। इस बार इन माफिया के लोगों को पकड़ने के लिए वन विभाग पूरी तरह से सतर्क है।
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