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Una News: मालवाहक वाहनों में मौत का सफर, 11वें दिन फिर हादसा

Sat, 20 Apr 2024 01:45 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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समूर में हादसे के दौरान सडक में पल्टा पिकक्प ट्रला।संवाद
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ऊना। पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से मालवाहन वाहनों में सवार होकर प्रदेश के धार्मिक स्थलों को आने वाले श्रद्धालु लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं। मगर तो श्रद्धालु अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और न ही पुलिस प्रशासन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती कर रहे हैं। यही कारण है कि मालवाहक वाहनों में आने वाले श्रद्धालु बंगाणा क्षेत्र में 11 दिन के भीतर दो सड़क हादसों का शिकार हुए हैं। इन हादसों में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि लगभग 30 लोग घायल हो चुके हैं।
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जानकारी के अनुसार ऊना और इसके साथ लगते अन्य जिलों में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में मेले शुरू होने पर शीश नवाने के लिए लाखों श्रद्धालु पड़ोसी राज्य पंजाब से आते हैं। इस दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से पहले ही हिदायत दी जाती है कि मालवाहक वाहनों में सफर न करें। मगर लोग हिदायतों की अनदेखी कर प्रदेश में मालवाहक वाहनों पर सवार होकर दाखिल हो रहे हैं। इस दौरान विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में हादसे का शिकार होने पर जानमाल का नुकसान हो रहा है।
हैरत की बात यह है कि पंजाब और हिमाचल पुलिस के सीमाओं पर तैनात जवान भी श्रद्धालुओं को नियम तोड़ने वालों को रोकने में असमर्थ हैं। ट्रैक्टर ट्रालियों, टेंपो, पिकअप, कैंटर सहित अन्य मालवाहकों पर डबल डेकर बनाकर श्रद्धालु सरेआम सीमाओं को पार करते हैं। यहीं नहीं बड़े शहरों के गुजरते समय उन्हें चालान का खौफ भी नहीं होता। चौक-चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी भी ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई करने से गुरेज करते नजर आते हैं।
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ध्यान रहे कि बीती नौ अप्रैल को बंगाणा के हरीनगर के नजदीक श्रद्धालुओं का एक टेंपो अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया था। हादसे में एक व्यक्ति की मौत तथा करीब 12 घायल हो गए। इसके बाद अब शुक्रवार को समूर खुर्द में एक पिकअप पलट गई। इसमें तीन बच्चे गंभीर हालत में पीजीआई रेफर किए गए हैं, तो वहीं 15 अन्य लोग भी घायल हुए। अब देखना यह है कि इन हादसों के बाद भी पुलिस प्रशासन कितनी सतर्क होती है।
डीएसपी हेडक्वार्टर अजय ठाकुर ने बताया कि पुलिस यातायात नियमों को तोड़ने वालों पर नकेल कस रही है। प्रतिदिन चालान किए जाते हैं। मगर ऐसे मामलों में लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। मालवाहक वाहनों में सवार लोग अपने साथ परिवार का भी जीवन दांव पर लगाते हैं। ऐसे मामले तभी रुक पाएंगे, जब लोग अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।
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