संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आम जनता को पुलिस से नहीं बल्कि कानून तोड़ने और गलत काम करने से डरना चाहिए। पुलिस ने लोगों के साथ दोस्ताना व्यवहार के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। पुलिस आपकी सुरक्षा और अपराध की रोकथाम के लिए है। इसे अपनी दोस्त समझें। ये बात डीएसपी अनिल पटियाल ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ईसपुर में अमर उजाला फाउंडेशन के पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में कही।
डीएसपी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों से बातचीत करने का मंच मिलता है। सरकारी स्कूल के विद्यार्थी खुद को आगे लाने में झिझकते हैं। इस कारण वे मेहनती होने के बावजूद जीवन में पीछे रह जाते हैं। अपनी प्रतिभा को सबके सामने आने से न रोकें। सरकारी स्कूलों में निजी के मुकाबले कई गुना अच्छे अध्यापक होते हैं। उनकी बातों का अनुसरण करो। दिनचर्या में अनुशासन लाएं। समय तालिका बनाएं और हरके विषय की पढ़ाई के लिए प्रतिदिन समय निकालें। अनुशासन के साथ आप अगर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
नाका देखकर पुलिस को गाली तो निकाल दें, पर हेलमेट नहीं पहनेंगे
डीएसपी ने कहा कि हादसों में जान गंवाने वालों में 60 प्रतिशत 25 साल से कम उम्र वाले युवा होते हैं। युवाओं की हादसों में इस प्रकार मृत्यु देश के लिए एक बड़ी क्षति है क्योंकि आप ही भविष्य हो। हादसों का सबसे अधिक शिकार बाइक सवार होते हैं। बिना लाइसेंस गाड़ी न चलाएं और हेलमेट अवश्य पहनें। चारपहिया में सीट बेल्ट लगाएं। पुलिस नाके देख लोग गाली तो निकाल देंगे लेकिन हेलमेट नहीं पहनेंगे। नाके लगाने का मकसद हादसों और अपराध को रोकना है। चप्पल पहनकर बाइक चलाने वालों का भी चालान होता है। लर्निंग लाइसेंस वाला तभी वाहन चला सकता है अगर उसके साथ वाहन में लाइसेंस धारक बैठा है। अगर अपराध करेंगे तो भविष्य खराब होगा और न आप सरकारी नौकरी के हकदार होंगे और न विदेश जा पाएंगे।
मोबाइल का इस्तेमाल सोच समझकर करें
डीएसपी ने कहा कि कोराना काल के बाद लगभग हर विद्यार्थी के पास मोबाइल है। मोबाइल का इस्तेमाल सोच समझकर करें। कम जानकारी के कारण विद्यार्थी अपराधों का शिकार हो रहे हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें। अगर किसी ने आपके मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया के अकाउंट का इस्तेमाल गलत कार्यों के लिए किया तो उसके जिम्मेदार आप भी होते हैं। इसलिए केवल पढ़ाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करें।
हादसों के घायलों की कोई मदद क्यों नहीं करता: ज्योति
12वीं की छात्रा ज्योति ने सवाल किया कि सड़क हादसों में घायल हुए लोगों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आता। इसका क्या कारण है ? डीएसपी ने कहा कि लोगों के मन में डर है कि पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। मदद करने वाले की अपनी मर्जी है कि वह घायल को अस्पताल छोड़ने के बाद वहां रुकना चाहता है या नहीं। पूछताछ का हिस्सा बनना या नहीं, यह भी उसके ऊपर है। इसके लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता।
पुलिस की मदद कैसे करें : धर्मप्रीत
12वीं के धर्मप्रीत ने पूछा की भ्रष्टाचार और अपराध को कम करने के लिए विद्यार्थी पुलिस की मदद कैसे कर सकता है। डीएसपी ने बताया कि पुलिस की मदद के लिए कई हेल्पलाइन नंबर और एप्स हैं। आप अगर कोई भी जानकारी पुलिस को देते हो तो आपका नाम साझा किए बगैर कार्रवाई की जाएगी। आपके आसपास कुछ भी गलत हो रहा है तो तुरंत पुलिस को सुचित करें।
प्रधानाचार्य मदल लाल बन्याल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से आम जनता और पुलिस के बीच की दूरी कम होती है। कहा कि बच्चों को डीएसपी से कई बहुमूल्य जानकारियां मिली हैं और उम्मीद है कि विद्यार्थी उसका सदुपयोग करेंगे। मंच संचालन अध्यापिका नीलम कुमारी ने किया। कंचन एवं साथियों ने स्वागत गीत गाया। छात्रा परनीत ने रोड सेफ्टी विषय पर बोलते हुए सड़क हादसों के कारण और उनसे बचाव की जानकारी दी। इस मौके पर उप प्रधानाचार्य प्रीति चौधरी, ग्राम पंचायत की प्रधान बक्शो देवी, प्रवक्ता किरण शर्मा, ऊषा रानी, रेनू बाला, अनीता रानी, सपना शर्मा, शिप्रा सैनी, डीपीई यशपाल सहित प्राथमिक स्कूल का स्टाफ भी उपस्थित रहा।