कहा- एनजीओ, कर्मचारियों के अलग संगठन बनाना दुर्भाग्यपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अराजपत्रित कर्मचारी संघ (एनजीओ) की विचारधारा मौकापरस्त है। यह बात राष्ट्रीय इंटक के संगठन सचिव और प्रदेश इंटक के महासचिव जगत राम शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि देश की आजादी से पहले 1920 में एटक और तीन मई 1947 को इंटक बनी। इन्होंने देश की आजादी और आजादी के बाद देश के विकास में भरपूर योगदान दिया। आजादी के बाद अलग-अलग विचारधाराओं से भारतीय मजदूर संघ, सीटू व अन्य कई राष्ट्रीय मजदूरों के संगठन बने। कभी-कभी यह राष्ट्रीय संगठन आज की तरह इकट्ठे होकर संघर्ष करते थे और एकता के बल पर मांगें मनवा लेते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से देश के कई प्रदेशों में कुकुरमुत्तों की तरह एनजीओ, कर्मचारियों ने अपने-अपने संगठन बना लिए। उनका मूल सिद्धांत अपने तक सीमित रहता है। जैसा की दूसरी मान्य प्राप्त यूनियनों की मदद लेकर नौकरी प्राप्त करना और अपनी मूल यूनियन को छोड़ देना। कहा कि यह एनजीओ की यूनियनें कभी राष्ट्रीय मांगों पर न आंदोलन करती है, न राष्ट्रीय आंदोलन में कोई हिस्सा लेती हैं। जगत राम ने स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की बात को याद दिलाया कि मजदूरों को ईमानदारी से संघर्ष करना चाहिए। हिमाचल कर्मचारी एनजीओ की स्थापना 20 नवंबर 1966 को हुई थी। इससे पहले इंटक, एटक, सीटू तथा बीएमएस के झंडे तले काम होता था। जगत राम ने अफसोस प्रकट किया कि जबसे हिमाचल में एनजीओ बना कभी एकजुट नहीं रहा। दो तीन धड़ों में बंटे रहे और उनको सलाह दी की एकजुट होकर सरकार व प्रगतिशील कामों का समर्थन करें।