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लोभ ने मनुष्य को पाप के कीचड़ में धकेला : अतुल कृष्ण

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ऊना। जो भगवान को अपना मानकर जीवन जीते हैं, उनकी बुद्धि सफलता के आकाश छूने लगती है। एकमात्र मनुष्य शरीर में ही ईश्वरीय अनुभव उतारे जा सकते हैं। हम चाहें तो अपनी प्रज्ञा का उपयोग कर सदा के लिए सुखी हो सकते हैं। अनित्य संसार के साधनों के लिए हम जितने प्रयत्नशील हैं, उससे कम प्रयत्न में ही नित्य परमात्मा से मुलाकात हो सकती है। ये अमृत वचन श्री भक्तमाल कथा महोत्सव के छठे दिवस में अतुल कृष्ण ने कम्युनिटी सेंटर ज्वार में कहे। उन्होंने कहा कि जिसने अपने आप को जान लिया, उसका जीवन सुखी हो गया। अपने को जान लेने में ही प्रभु को जान लेने का मार्ग छिपा हुआ है। नाशवान सुखों की लालसा ने ही हमें दीन-हीन बना दिया है। तुच्छ लोभ ने हमें पाप के कीचड़ में धकेला हुआ है। मोह से अंधे बने हम बार-बार जन्म एवं मरने के लिए विवश होते हैं। जीव थोड़े से सुख की आकांक्षा में अपने कीमती जीवन को गंवाकर अंत में रोता है। यह रोना हंसने में बदल सकता है, अगर सर्व दुखहारी भगवान की शरण प्राप्त कर लें।
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