सरकार ने अनिश्चितकालीन लगाया है प्रतिबंध
राष्ट्रीय किसान संगठन और भारतीय किसान संघ ने किया मांगों का समर्थन
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। पिछले कुछ समय से सूखे खैर के पेड़ों की कटाई को लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है। किसानों का कहना है कि सूखे खैर की लकड़ी को काटने की अनुमति न मिलने से उनका आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि सूखे पेड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल न सिर्फ उनके लिए आय का स्रोत है, बल्कि इससे जंगलों में आग लगने का खतरा भी कम हो सकता है। सरकार ने अनिश्चितकाल के लिए सूखे खैर के पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिससे किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रतिबंध को लेकर किसानों ने सरकार से आग्रह किया है कि वे सूखे खैर की कटाई की अनुमति दें, ताकि उन्हें अपने नुकसान से उबरने का मौका मिल सके। किसानों का कहना है कि सूखे खैर की लकड़ी का सही उपयोग होने से पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा और इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं लेकिन सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वर्तमान में किसानों का मानना है कि यदि सूखे खैर की कटाई पर प्रतिबंध जारी रहा तो उनकी आजीविका पर गहरा प्रभाव पड़ेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में संकट उत्पन्न हो सकता है। किसान सतीश कुमार, अशोक कुमार, जयवीर, कमलदेव, अशोक ठाकुर, राजेंद्र कुमार, बामदेव और विपन ने सरकार से मांग की है कि सूखे खैरों को काटने की अनुमति प्रदान की जाए। वहीं, किसान संगठन के राष्ट्रीय मंत्री देशराज मोदगिल का कहना है किसानों की मांग जायज है। सरकार को इस मांग को पूरा करना चाहिए। भारतीय किसान संघ के खंड बंगाणा के अध्यक्ष योगराज शर्मा ने किसानों की इस मांग का समर्थन किया है।