ऊना। पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में नियमों के विपरीत एसिड और केमिकल उद्याेगों का संचालन किया जा रहा है। इस मसले में एनजीटी से आठ माह से सिर्फ तारीख पे तारीख ही मिल रही है। उद्योग संचालक भी एनजीटी में सार्थक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। न तो नियमों के तहत पौधे लगाए गए हैं और न ही सीईटीपी प्लांट आज तक स्थापित हो पाया है। पांच एमएलडी का सीईटीपी का प्लांट स्थापित किए जाने प्रस्तावित है। जिसके कारण उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के कटघेरे में है। वहीं वन विभाग की एनओसी की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हुए हैं। अब एनजीटी ने तीन सितंबर 2026 की तारीख अगली सुनवाई के लिए दी है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि 500 हेक्टेयर भूमि से कम क्षेत्र में उक्त कैटेगरी के उद्योग नहीं लगाए जा सकते हैं। ऐसे में पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में इन उद्योगों को लगाने की अनुमति कैसे संभव हो गई। एनजीटी नई दिल्ली के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की ओर से इस मामले में सुनवाई की गई। पूरे मामले को लेकर सरकार एवं उच्चाधिकारियों को एनजीटी नई दिल्ली में चुनौती शिकायतकर्ता ऊना के नजदीकी गांव कोटला कलां निवासी मनोज कौशल ने दी है। वहीं बड़ी परियोजनाओं से हजारों पेड़ काटने की बजाय ट्रांसप्लांट किया जाए और इस बारे में डीसी ऊना ने आश्वस्त भी किया था। कोई भी कार्यवाही धरातल पर नहीं हुई है। 30 हेक्टेयर एरिया में जंगल और पहाड़ हैं, जिनको बचाने के लिए एनजीटी में याचिका दायर की गई है जबकि 29 हेक्टेयर के करीब उद्योग लगाने के लिए काट दिया गया है। 8.24 करोड़ रुपये वन विभाग ऊना को उद्योग विभाग की ओर से पौधे लगाने के लिए बजट दिया था लेकिन इसमें से 70 लाख रुपये के ही पौधे लगाए हैं। वहीं प्रदूषण बोर्ड ऊना से उद्योग क्षेत्र में भी सीईआर फंड के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब आज तक नहीं मिला है। याचिकाकर्ता के अनुसार अगर सीईटीपी प्लांट लग जाए तो उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी से स्वां नदी भी दूषित होने से बचाया जा सकता है।