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मुफ्तखोरी संस्कृति से देश और समाज को भारी नुकसान : ठाकुर चमेल

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आने वाली पीढि़यों के लिए घातक साबित होगी मुफ्त की उम्मीद
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संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। मुफ्तखोरी की संस्कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिशाप साबित होगी। यह कहना है भारतीय किसान संघ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर चमेल सिंह का। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुफ्त की संस्कृति समाज को आर्थिक रूप से कमजोर और नैतिक रूप से खोखला कर रही है। वे गगरेट के एक निजी होटल में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ ट्रक यूनियन गगरेट के भजन लाल, नवीन जसवाल और अरविंद ठाकुर भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि समय रहते इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इसका दुष्प्रभाव देश की प्रगति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ेगा। ठाकुर चमेल सिंह ने कहा कि सरकार को मुफ़्तखोरी की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के बजाय मेहनत की प्रेरणा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। सरकारी योजनाओं के नाम पर मुफ्त की सुविधाएं देना समाज को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय निर्भरता की ओर धकेल रहा है। इससे न केवल राजकोष पर दबाव बढ़ता है, बल्कि लोगों में परिश्रम की भावना भी कम होती जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को दूर करने का सही तरीका मुफ्त की योजनाएं नहीं, बल्कि कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। ठाकुर चमेल सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि मुफ़्त की योजनाओं को सीमित कर, श्रम और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली नीतियां लागू की जाएं। मुफ़्त की उम्मीद रखने की प्रवृत्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक साबित होगी। सरकार को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि समाज को सशक्त और स्वावलंबी बनाया जा सके।
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