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जाति गणना पर कांग्रेस और भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आया : बलवीर

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कहा- भाजपा और कांग्रेस कहीं जाति गणना के विरोध में तो कहीं समर्थन में
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संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जाति गणना को लेकर कांग्रेस और भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आया है। भाजपा कहती है कि हमारे लिए गरीब ही जाति है। यदि भाजपा के लिए गरीब ही जाति है तो धूमल सरकार ने 2002 में एक विशेष समुदाय को सामान्य वर्ग से निकालकर ओबीसी वर्ग में क्यों शामिल करवाया। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी, महासचिव कैप्टन अमरीक सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष फ्लाइंग अधिकारी पूर्ण देव चौधरी ने साझा बयान में यह बात कही है। एक तरफ भाजपा विपक्षी दलों पर आरोप लगाती है कि वे समाज में जाति गणना की बात करके समाज में जहर घोल रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा बिहार के जाति सर्वे का खुलेआम समर्थन कर चुकी है। एक तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा तथा विप्लव ठाकुर जाति गणना का विरोध कर चुके हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस वर्किंग कमेटी कांग्रेस शासित प्रदेशों में जाति गणना करवाने की घोषणा कर चुकी है। पिछले दो साल से कांग्रेस की वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि यही नहीं मलाणा राजस्व गांव की सभी सामान्य वर्ग की जातियां ओबीसी वर्ग में शामिल कर दी गई हैं। ब्राह्मण समुदाय की तीन उपजातियां ओबीसी वर्ग में शामिल कर दी गईं। मंडी चौहारघाटी की 12 पंचायतों की सभी सामान्य वर्ग की जातियां ओबीसी वर्ग में शामिल हो चुकी हैं। कांगड़ा जिले के छोटा भंगाल और बड़ा भंगाल की सभी सामान्य वर्ग की जातियां ओबीसी वर्ग में शामिल हो चुकी हैं। इसके उपरांत ओबीसी वर्ग से सत्ता छीनने के लिए कांग्रेस और भाजपा ने 2022 में जातीय समीकरणों को आधार मानकर राजपूत और ब्राह्मण समुदाय को विधानसभा की टिकटों का आवंटन कर दिया। लेकिन, ओबीसी वर्ग की किसी भी जाति को जातीय समीकरणों के आधार पर टिकट आवंटन नहीं किया। कहा कि कांग्रेस और भाजपा ने राजपूत समुदाय को 68 में से 28-28 सीटें इसलिए आवंटित कर दी क्योंकि राजपूत समुदाय के मतदाताओं की प्रदेश में संख्या 32 फीसदी है। कांग्रेस ने ब्राह्मण समुदाय को विधानसभा की 12 तथा भाजपा ने नौ सीटें इसलिए आवंटित कर दीं क्योंकि प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय की संख्या 18 प्रतिशत है। कांग्रेस ने 25 प्रतिशत ओबीसी समुदाय को विधानसभा की तीन सीट तथा भाजपा ने मात्र पांच सीट का आवंटन इसलिए किया क्योंकि यह दोनों राजनीतिक दल ओबीसी समुदाय की 48 जातियों के मतदाताओं की संख्या सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे।
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