रायपुर सहोड़ा में पांच दिनों तक हुई अमृतमयी कथा
रायपुर सहोड़ा शिव मंदिर में श्रीभक्त माल कथा का विश्राम
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। जिले के गांव रायपुर सहोड़ा के प्राचीन रामेश्वर शिव मंदिर में पांच दिन तक चली श्री भक्त माल की कथा के दौरान अनेक महान संतों ने भक्तों का मार्गदर्शन किया। व्यासपीठ से साध्वी सहप्रिया ने प्रभु श्रीराम के परम भक्त संत तुलसी दास, मीराबाई तथा भक्त प्रह्लाद सहित अनेक अन्य संतों की कथा सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर किया। कहा कि भक्त और भगवान का रिश्ता भी बड़ा अजीब है। अपने भक्त की रक्षा के लिए खुद भगवान को इस धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेना पड़ता है। मीराबाई ने तो बचपन में ही श्री गिरधर गोपाल को अपना पति मान लिया था। गिरधर के प्रति उनकी निष्ठा ने ही उन्हें परम भक्त बना दिया। उन्होंने भक्त राज राम दास की महिमा का भी गुणगान किया। कहा भक्त की पुकार पर कभी भी और कहीं भी भगवान दौड़े चले आते हैं। सहप्रिया ने भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का वर्णन सुनाया और कहा कि कंस अपनी बहन देवकी को बहुत प्रेम करता था, लेकिन जब उसका विवाह हुआ और ससुराल जाते समय जब एक आकाशवाणी से उसे यह पता चला कि देवकी की आठवीं संतान उसका काल बन कर आएगी। इसलिए तुरंत कंस ने देवकी की पहली संतान को मार दिया और एक-एक कर छह संतानों को मार दिया। सातवीं संतान की रूप योगमाया ने जन्म लिया और आठवीं संतान के रूप में प्रभु देवकी की गर्भ में पधारे तो सभी देवताओं ने खुशी मनाई। आखिर वे रात्रि आई जब कृष्ण पक्ष को रोहिणी नक्षत्र और काली आधी रात को श्री कृष्ण ने कारागार में जन्म लिया।