ज्वार में चल रही भक्तमाल कथा सुनते हुए लोग। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जीवनभर संसार की प्रशंसा करेंगे तब भी उसे हम अपना नहीं बना पाएंगे। जबकि प्रभु की महिमा सुनेंगे अथवा गाएंगे तो वे हमारे हो ही जाएंगे। एक-एक पत्ते को सींचने की आवश्यकता नहीं, वृक्ष की जड़ में पानी डालेंगे तो सारे पत्तों का ही नहीं पूरे वृक्ष का भी सिंचन हो जाएगा। इसलिए इधर-उधर भटकना छोड़कर एकमात्र अपने सच्चे इष्टदेव श्री हरि के अधीन होना चाहिए। श्रीभक्तमाल कथा महोत्सव के पंचम दिवस में अतुल कृष्ण ने कम्युनिटी सेंटर ज्वार में कहा कि प्रभु प्रेम में बिक जाओ। हमारे जीवन की अंतिम गति ईश्वर ही हों, इस विश्वास को हृदय में बिठा लें। भवसागर देखकर डरो नहीं, अनन्य भाव से भगवान के बन जाओ। इस कलिकाल में कल्याण के अन्य साधन सफल होने कठिन हैं। अतः हृदय के संशय को त्याग कर परमात्मा को प्रेम की डोर में बांध लो। भगवान की कथा संसार के संतप्त जीवों के लिए कल्पवृक्ष की सुखद छाया जैसी है। प्रभु का स्मरण यदि जीवन के अंतिम क्षण में भी हो जाय तो भी हमारा परम कल्याण हो सकता है।