ऊना। उत्तरी भारत के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी मंदिर के विस्तारीकरण का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली की फर्म मंदिर के विस्तारीकरण का काम करेगी।
वर्तमान में विस्तारीकरण करने के काम की तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फर्म डिजाइन के कार्य में जुट गई है। मंदिर प्रबंधन की ओर से डीपीआर तैयार करके हिमाचल सरकार की ओर से केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज दी गई है। प्रसाद योजना के तहत 25 करोड रुपए की लागत से मंदिर का विस्तारीकरण किया जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा प्रसाद योजना के तहत मंदिर का विस्तारीकरण करने का शुभारंभ किया गया था, लेकिन बीच में चुनावों के चलते मंदिर का विस्तारीकरण का काम लटक गया और इस कार्य को अमलीजामा पहनाने के लिए मंदिर प्रबंधन को कंसल्टेंट न मिलने की सूरत में एक के बाद एक टेंडर लगाए गए। इसके चलते 12 जुलाई को कंसल्टेंट की तैनाती के लिए दिल्ली की फर्म का चयन करके अंतिम रूप दिया गया।
मंदिर का विस्तारीकरण करने के लिए 35 के तकरीबन दुकानों का भी अधिग्रहण किया गया है, जिसके चलते यहां पर मंदिर का विस्तारीकरण होने से श्रद्धालुओं को पहले की अपेक्षा और भी बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी। यहां पर प्रतीक्षा कक्ष से लेकर बिजली पेयजल सहित अन्य तमाम तरह की सुविधा एक छत के नीचे मुहैया होंगी। सुलभ शौचालयों सहित मंदिर तक रास्तों का भी सुसज्जित तरीके से निर्माण होगा। मंदिर का विस्तारीकरण करने के बाद दायरा 2791 वर्ग मीटर होगा, जो कि पहले 1115 वर्ग मीटर था। नए सिरे से 1676 वर्ग मीटर एरिया को जोड़कर विस्तारीकरण किया जाएगा।
वर्तमान में माता श्री चिंतपूर्णी का प्राचीन मंदिर लगभग 0-11-15 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित है। वर्तमान में अनुमान के मुताबिक हर साल लगभग 35-40 लाख तीर्थयात्री मंदिर में आते हैं और साप्ताहिक औसत यात्रा 70,000-80,000 लोगों की होती है। बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करने के इरादे से लगभग 0-16-69 हेक्टेयर की सीमा तक अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया है।
डीसी ऊना जतिन लाल का कहना है कि मंदिर के विस्तारीकरण को लेकर दिल्ली की फर्म को चयनित किया गया है। फर्म के कंसल्टेंट वर्तमान में मंदिर में डिजाइन के कार्य में लग गए हैं। जल्द ही तमाम प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंदिर के विस्तारीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
परियोजना में ये होगा शामिल
इस परियोजना में तीर्थयात्रियों की कतार प्रणाली, मुंडन समारोह क्षेत्र, मुंडन के बाद स्नान क्षेत्र, पेयजल सुविधाएं, प्रसाद वितरण स्थल, पूरे क्षेत्र में विद्युतीकरण कार्य, मंदिर के अग्रभाग का सौंदर्यीकरण, शौचालय सहित विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता है। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, सुंदर आंतरिक सज्जा, साइनेज और अन्य प्रासंगिक सिविल/इलेक्ट्रिकल कार्य, मंदिर के आसपास सुविधाओं के जीर्णोद्धार और उन्नयन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना है। मंदिर की सुंदरता और प्राचीन वास्तुकला संरक्षित रहेंगे। मंदिर के वास्तुशिल्प के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। तीर्थयात्री सुविधा केंद्र में क्लॉक रूम, टिकटिंग काउंटर, सूचना केंद्र, स्मारिका दुकानें, वीआईपी लाउंज, वीआईपी बग्गी सेवा, तीर्थयात्री प्रबंधन ब्लॉक, कतार प्रबंधन क्षेत्र, प्रसाद ब्लॉक, दुकानें, सुरक्षा और सेवा ब्लॉक, सीढ़ी एवं तालाब क्षेत्र का सौंदर्यीकरण एवं विकास अन्य सुविधाएं होंगी।