भरवाईं (ऊना)। अपने पोते-पोतियों को रोज की तरह स्कूल बस में चढ़ाने आई संतोष देवी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि शुक्रवार की सुबह उसकी आखिरी सुबह होगी और वह दोबारा कभी भी अपने पोते पोतियों का मुंह नहीं देख पाएगी।
स्वाणा गांव में एक निजी बस की चपेट में आने से 65 वर्षीय संतोष देवी की मौत से जहां गांव के लोग गमगीन हैं, वहीं अब रोज की तरह उनकी पोते पोतियों को स्कूल छोड़ने वाली उनकी दादी उन्हें कभी नहीं मिल पाएगी। शुक्रवार सुबह भी संतोष देवी अपनी पोती को सरस्वती स्कूल चिंतपूर्णी की बस में चढ़ाने के लिए आई थी। अपनी पोती को तो उन्होंने स्कूल बस में बैठा दिया, लेकिन खुद पास ही खड़ी निजी बस के टायरों के नीचे आकर मौत का ग्रास बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस के नीचे आने से पहले संतोष देवी ने कुछ स्कूली बच्चों को धक्का देकर उनकी जान भी बचाई। इस हादसे का मंजर मौके पर खड़े स्कूली बच्चों ने अपनी आंखों से देखा अपनी दादी पर चढ़ती बस और मौके पर हुई मौत को उसकी पोती भी यही कह रही थी कि दादी पर बस चढ़ गई।
मृतक संतोष देवी के तीन बेटे हैं, जिनमें दो दिल्ली में सेटल हैं और एक यहीं पर रहकर दिहाड़ी मजदूरी का काम करता है। इस हादसे से सवाल यह उठता है कि प्रदेश की सड़कों पर ऐसी कितनी खटारें बसें दौड़ रही हैं, जो धक्का स्टार्ट होने के कारण कभी भी किसी की जान लील सकती हैं। लोगों ने ऐसे निजी बस संचालकों पर कार्रवाई की मांग की है।