ऊना।
अगर अपराध रोकने वाली पुलिस ही भ्रष्ट हो जाए तो कानून व्यवस्था के अंजाम का अंदाजा लगाया जा सकता है। वीरवार को एसपी दिवाकर शर्मा की कार्रवाई से जाहिर हो गया कि जिले में पुलिस की मिलभ्भगत से ही नशा कारोबार फलफूल रहा है। पुलिस की सांठ-गांठ से नशा कारोबारियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि खुलेआम नशा कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है और पुलिस आंखें मूंदे है। एसपी दिवाकर शर्मा ने नशा माफिया को संरक्षण देने वाले पूर्व एसआईयू प्रभारी को सस्पेंड कर दिया। पूर्व एसआईयू टीम के प्रभारी बृजमोहन पर नशा कारोबारी से चार हजार रुपया हर माह लेने का आरोप हैं।
इससे एक बार फिर खाकी पर दाग लग गया है। इस मामले में पूर्व एएसपी पर भी नशा माफिया से 25 हजार रुपया हर माह लेने का संगीन आरोप लगा है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद कई और परतें खुलेंगी। नशा माफिया के खिलाफ विशेष पुलिस अभियान और मिलीभगत सामने आना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। अगर पुलिस ही माफिया से सांठ-गांठ कर जेबें भरने में लगीहै तो नशा माफिया पर कैसे लगाम लग पाएगी। हालांकि एसपी दिवाकर शर्मा की कार्रवाई ही ऐसे समय में पुलिस पर भरोसा भी जताती है जिन्होंने रिश्वत लेने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की।
सूत्र बताते हैं कि नशा कारोबारी पूर्व एएसपी के घर में जाकर इस धंधे को चलाने की एवज में महीना देते थे। इसके बदले में कारोबारी को धंधा चलाने में राहत मिलती थी। एसआईयू टीम के प्रभारी ने नशा कारोबारी से चार हजार रुपया महीना लेना निर्धारित कर रखा था। पुलिस इसके कारोबार पर नाममात्र दबिश देती और कागजी कार्रवाई कर वापस लौट आती। अभी हाल ही में दिवाकर शर्मा मुबारिकपुर चौक पर नाकाबंदी का निरीक्षण करने पहुंचे थे जहां नाके से वाहन निकालने के नाम पर वाहन चालक से पुलिस कर्मी ने रिश्वत ली थी। एसपी दिवाकर शर्मा ने इस मामले में पूरी नाका टीम को निलंबित कर दिया था। अब ऊना में तैनात पूर्व एएसपी और एसआईयू इंचार्ज पर ऐसे आरोप लगाना पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में लाकर खड़ा करता है।
पुलिस के भीतर भी नहीं बचेंगे अपराधी : दिवाकर
एसपी दिवाकर शर्मा का कहना है कि अपराधी अगर पुलिस के अंदर भी हैं तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। एसपी ने कहा कि पुलिस का अभियान लगातार जारी है। जिले में नशा कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा।