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स्कूल बसों में टक्कर, चार बच्चे घायल

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निजी स्कूल दो बसों में टक्कर, चार बच्चे घायल
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घंडावल मोड़ पर हादसा, जरा सी लापरवाही ले सकती है बच्चों की जान
नूरपुर हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना।
नूरपुर में हुए स्कूल बस हादसे के बाद भी निजी स्कूल और जिला प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। ऊना के घंडावल में एक निजी स्कूल की दो बसों में जबरदस्त टक्कर हो गई। इस हादसे में बस में सवार चार नन्हें स्कूली बच्चे घायल हुए हैं। इनको उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि इस दौरान एक बड़ा हादसा होने से टल गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार ऊना के नजदीकी स्कूल रुद्रा इंटरनेशनल में दोपहर बाद छुट्टी होने के बाद स्कूल की बसों में बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। इसी दौरान घंडावल मोड़ के समीप स्कूल की दो बसों में भिड़ंत हो गई जिससे बस में बैठे बच्चे बुरी तरह सहम गए। हादसे में बस में सवार चार बच्चों को काफी चोटें पहुंची। लोगों ने जब बच्चों के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनी तो तुरंत बच्चों को बस से बाहर निकाला। साथ ही, मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना स्थल का जायजा लिया। अभी तक हादसे के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। इस हादसे में दोनों वाहनों का काफी नुकसान हुआ। बताया जा रहा है कि दोनों बसों में भारी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं अपने घरों को जा रहे थे। उधर, एसपी दिवाकर शर्मा ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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गौर हो कि नूरपुर में लापरवाही ने 27 जिंदगियां छीन ली थी। वहीं ऊना में निजी स्कूल इस हादसे के बाद गहरी नींद में सोए हैं। स्कूल प्रशासन जान बूझकर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं। इन पर शिकंजा कसने में जिला प्रशासन भी नाकाम साबित हो रहा है। जिला प्रशासन ने हादसे के तुरंत बाद स्कूली बसों की चेकिंग करने का अभियान तो चलाया लेकिन यह सिरे नहीं उतर पाया। पुलिस ने भी महज चालान काटने तक ही अपनी कार्रवाई को सीमित कर दिया और मौत के सफर का सिलसिला अब तक जारी है।

अमर उजाला ने पहले ही किया था आगाह
नूरपुर में स्कूल बस हादसे के बाद जिला प्रशासन भी किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा दिखाई दे रहा है। निजी स्कूल सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं लेकिन प्रशासन आंखें मूंद कर सोया है। ‘अमर उजाला’ ने हाल ही में निजी स्कूलों के इस कारनामे को जगजाहिर किया लेकिन यह सिलसिला जारी है।
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ठूंस-ठूंस कर बोनट पर भी बिठाए जा रहे बच्चे
चालकों का कहना- इत्थे केहड़ा पहाड़ी ईलाका है
शहरों में तो नियम ठेंगे पर हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में खोले निजी स्कूल ज्यादा नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। स्कूल के नुमाइंदे कह देते हैं कि यहां पर कौन सा कोई देखने के लिए आ रहा है। हम बच्चों को ज्यादा लाएं चाहे कम। कुछ चालक तो यह भी कहते हैं कि एह केहड़ा पहाड़ी इलाका है, जेहड़ा बस खाई विच गिर जाणी।
एसपी दिवाकर शर्मा ने कहा कि नियम तोड़ने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया है।
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