अंगारों से धधकने लगी शिवालिक की पहाड़ियां
कभी माफिया तो कभी अग्नि की चपेट में आ रहे जंगल
वन विभाग के पास नहीं इस आपदा से निटपने का इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
गगरेट (ऊना)।
हिमालय की तलहटी में बसी शिवालिक की पहाड़ियों का सीना इन दिनों अंगारों से धधक रहा है। इस समय शिवालिक की लगभग समूची रेंज कहीं न कहीं आग की चपेट में है। सीमांत क्षेत्र में बसी शिवालिक की गोद में बैठ कभी वन माफिया शिवालिक का ही सीना छलनी करता है तो कभी जंगल मे उठी छोटी सी चिंगारी एक बड़ी आग का रूप धारण कर लाखों की वन संपदा को लील रही रही है। साथ में यह अग्नि शिवालिक की शरण में रह रहे लाखों जीव-जंतुओं के लिए भी प्रलय बन कर आती है। अफसोस है कि विभाग के पास अभी भी इस आपदा से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। भयंकर गर्मी से इन दिनों जंगल पूरी तरह सूख गए हैं। इसके चलते जंगल में हल्की सी इंसानी चूक भी जंगलों की बर्बादी का कारण बन रही है। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वन माफिया अपनी चोरी को छुपाने के लिए निर्दयता से इस कृत्य को अंजाम रहा है। इस सीजन में जंगलों में लगी आग से न केवल मौसम में खासी गर्मी ला दी है बल्कि जंगलों की आग रिहायशी मकानों तक पहुंच कर उन्हें भी भस्म करने पर आमादा है। इस कारण गगरेट क्षेत्र के विभिन गांवों में अग्नि की चपेट में गोशालाएं व घर भी आ चुके हैं। क्षेत्र के रमेश लौ, ओंकार नाथ, विकास विक्की, विजय भारद्वाज, संजीव पराशर, अरविंद आदि के अनुसार जंगलों में आग से निपटने के लिए सरकार को पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। डीएसपी अंब मनोज जंवाल ने बताया कि क्षेत्र की सभी पंचायतों के बाशिंदे अपने इलाके में नजर रखें तथा ग्राम पंचायत प्रधान सचेत रहें जिससे आग से जंगलों को बचाया जा सके।