ऊना। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय दो जिला ऊना शाविक घई की अदालत ने 12 साल बाद आरोपी को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 और 196 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दोषी ठहराया है। खुली अदालत में यह फैसला सुनाया गया। अधिवक्ता ने बताया कि दोषी पहली बार अपराध कर रहा है और उसके खिलाफ कोई पूर्व दोषसिद्धि का आरोप नहीं है और न ही साबित हुआ है और मामले पर नरमी बरतने का अनुरोध किया। मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 1500 रुपये जुर्माना लगाया है। बता दें 17 मार्च 2014 को लगभग सुबह 8:30 बजे आरोपी हरदीप सिंह पंजीकरण संख्या पीबी-10-सीएफ-3753 वाली मोटरसाइकिल चला रहा था। आरोप है कि उक्त मोटरसाइकिल को तेज गति से और गलत दिशा में चलाते हुए आरोपी ने पंजीकरण संख्या पीबी-10-सीएल-1126 वाली दूसरी मोटरसाइकिल से टक्कर मार दी जिसे गुरप्रीत सिंह चला रहा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार दुर्घटना की सूचना शिकायतकर्ता गगनदीप ने दी। जो घटनास्थल पर मौजूद था और पंजीकरण संख्या पीबी-32-के-0875 वाली दूसरी मोटरसाइकिल चला रहा था। जांच के दौरान, पुलिस ने घायलों की मोटर वाहन लाइसेंस (एमसीएल) प्राप्त की, दुर्घटना में शामिल मोटरसाइकिलों को जब्त किया और उनका यांत्रिक निरीक्षण कराया। यह भी आरोप है कि आरोपी वैध ड्राइविंग लाइसेंस और दुर्घटना में शामिल वाहन का बीमा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहा जिसके परिणामस्वरूप मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 और 196 के तहत भी अपराध जोड़े गए। जांच पूरी होने पर, आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 338 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 और 196 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप पत्र दायर किया गया। जिस पर अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया है।