औद्योगिक संघों ने आयोजन की दिशा और दबावपूर्ण सहयोग पर जताई आपत्ति
आरोप, आयोजन में बाहरी चकाचौंध को तरजीह दी जा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। गगरेट स्थित महादेव द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी में प्रशासन की ओर से पहली बार आयोजित की जा रही दो दिवसीय स्टार नाइट अब श्रद्धा और संस्कृति के बजाय विवाद और असंतोष का कारण बनती दिख रही है। संयुक्त औद्योगिक संघ गगरेट और अंब के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की रूपरेखा, खर्च और सहयोग की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। संघ के अनुसार गत वर्ष मेले के दौरान स्थानीय कलाकारों को मंच देकर सादगीपूर्ण और सार्थक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसे उद्योगों और समाज का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ था। इस बार आयोजन में बाहरी चकाचौंध को तरजीह दी जा रही है। स्थानीय पहचान को पीछे छोड़ते हुए लाखों की लागत से बाहरी कलाकार आमंत्रित किए जा रहे हैं। औद्योगिक संगठनों ने आरोप लगाया कि जनसहयोग के नाम पर सहयोग नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों में दिया गया योगदान श्रद्धा से प्रेरित होना चाहिए, न कि प्रशासनिक अपेक्षाओं या सामाजिक दबावों से। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब हरोली जैसे क्षेत्र में इस समय राज्य स्तरीय मेले आयोजित हो रहे हैं, तब गगरेट जैसे ऐतिहासिक और ग्रामीण स्थल पर इस तरह की प्रतिस्पर्धा और भव्यता का औचित्य क्या है। संघ का कहना है कि शिवबाड़ी मेला स्थानीय संस्कृति, लोक कला और जनभागीदारी का प्रतीक रहा है, लेकिन अब यह एक इवेंट मैनेजमेंट कार्यक्रम में बदलता जा रहा है। आरोप लगाया कि आयोजन प्रशासनिक छवि निर्माण का माध्यम बनता जा रहा है, जिससे मेले की मूल भावना आहत हो रही है। संघ ने प्रशासन व राज्य सरकार से आग्रह किया है कि भविष्य में मेले को बाहरी चमक-दमक से दूर रखते हुए इसकी जड़ों और परंपराओं से जोड़ा जाए। साथ ही औद्योगिक इकाइयों को सहयोगी के रूप में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाए, न कि दबाव के माध्यम से आर्थिक सहयोग के लिए बाध्य किया जाए।