श्रीमद्भागवत कथा के दौरान राधा-कृष्ण के स्वरूप में भक्तजन। -स्रोत : आयोजक
अंब (ऊना)। उपमंडल अंब के कुठेड़ा खैरला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। कथावाचक पंडित सुमित शास्त्री ने कहा कि ओंकार संपूर्ण सृष्टि का आधार है। जो व्यक्ति ओंकार का निरंतर जप करता हुआ शरीर त्यागता है, वह परम गति को प्राप्त करता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान चरणों से मुखारविंद तक और श्री राधा रानी का मुखारविंद से चरणों तक करना चाहिए, जिससे दोनों के हंसते हुए मुखारविंद ह्रदय में बस सकें। शास्त्री ने विभिन्न देवताओं के पूजन से प्राप्त होने वाले लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि यश के लिए नित्य हवन करें, वाणी दोष दूर करने के लिए हयग्रीव मंत्र का जाप करें। इस अवसर पर श्रोताओं ने सुंदर भजनों पर भावविभोर होकर भक्ति में डूबकर आनंद लिया। इस दौरान कई भक्तजन राधा-कृष्ण के स्वरूप में भी नजर आए। कार्यक्रम में जगतार सिंह, लक्ष्मण, गौरव राणा, प्रशांत, पूनम गोस्वामी, शीला, मनोरमा, वसुधा व अराध्या सहित कई भक्तों ने भाग लिया। संवाद