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सावधान: डीजे की ऊंची आवाज से पलभर में बिगाड़ सकता है स्वास्थ्य

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एसडी शर्मा
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मैहतपुर (ऊना)। आजकल शादियों का सीजन चल रहा है। हर शादी समारोह में डीजे की धुन पर थिरकना सब को अच्छा लगता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि डीजे की बेहद ऊंची ध्वनि हमारी सेहत को पलभर में बिगाड़ सकती है। यही नहीं, दिल के रोगियों के लिए भी डीजे की ऊंची ध्वनि घातक साबित हो सकती है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए डीजे की ध्वनि अधिक हानिकारक साबित हो सकती है। खतरनाक ध्वनि प्रदूषण से अनजान अधिकतर लोग ये नहीं जानते कि डीजे की तीव्र ध्वनि उनके बच्चों की सेहत पर क्या असर डाल सकती है।
कुछ समय से शादियों में डीजे का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति 50 डेसीबल तक की ध्वनि को सहन कर सकता है, डीजे की ध्वनि की तीव्रता 500 डेसीबल तक होती है। इससे अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि डीजे हमारे लिए किस कद्र खतरनाक है।
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डीजे की तेज ध्वनि से आदमी का शरीर तक कांप उठता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि हमारे घर में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 और रात्रि में 20 से 25 डेसीबल तक ध्वनि होनी चाहिए। वाहनों के प्रेशर हॉर्न और मशीनों की आवाज से ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता बढ़ जाती है। डीजे की तीव्र ध्वनि के पास खड़े रहना सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिल के मरीजों, कमजोर दिल वाले लोगों को डीजे से दूर ही रहना चाहिए।
डीजे की बेहद ऊंची ध्वनि मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन और रक्तचाप बढ़ जाता है। तीव्र ध्वनि से प्रजनन क्षमता घट जाती है। गर्भपात की शिकायत और मानसिक तौर पर विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है। डीजे की ऊंची आवाज के कारण बहरेपन का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।
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-डॉ. केआर आर्य, ईएनटी विशेषज्ञ, मैहतपुर।
डीजे ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं। रात्रि 10:00 बजे के बाद डीजे बजाने पर पूर्ण पाबंदी है। 10:00 बजे के उपरांत अगर कहीं डीजे बजता है, तो इसकी शिकायत मिलने कार्रवाई की जाती है।
-प्रवीन धीमान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, ऊना।
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