ऊना। आलू की फसल अंकुरित होकर जमीन के बाहर आने लगी है। इस बीच फसल की पत्तियों को सुंडी लगनी शुरू हो गई है। फसल को बचाने के लिए किसानों ने कीटनाशकों का छिड़काव करना शुरू कर दिया है।
इससे किसानों को फसलों की सिंचाई के साथ कीटनाशकों के छिड़काव में भी कसरत करनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार जिला में 3000 हेक्टेयर के आसपास आलू की दो माह वाली फसल लगाई गई है। अधिकतर फसल ऊना, हरोली, संतोषगढ़ और हरोली इलाके में लगाई गई है। बीते दिनों अच्छी बारिश के बाद आलू का बीज तेजी से अंकुरित हुआ और फसल बाहर आने लगी है, लेकिन जैसे ही फसल को पत्तियां आना शुरू हुईं, उसके साथ ही कीड़े ने हमला बोल दिया। ऐसे में किसानों को इन दिनों फसल की सिंचाई करने के साथ उसमें कीटनाशकों का छिड़काव करने में मशक्कत करनी पड़ रही है। किसान रविंद्र कुमार, तिलकराज, प्रेम चंद, तरसेम लाल, राजेश सैनी सहित अन्य ने कहा कि आलू की फसल में कई साल बाद ऐसे हुई कि अंकुरित होते पत्तों पर कीड़े ने हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बार बीज पहले ही महंगी कीमत पर मिला। अब कीटनाशकों पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। किसानों ने कहा कि बीते दिनों अच्छी बारिश के बाद तेज धूप खिल रही है। सिंचाई भी करनी पड़ रही है। वर्तमान में सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव में सारा समय खप रहा है।
आलू की फसल में सूंडी लगने के मामले सामने आए हैं। किसान नजदीकी केंद्र से परामर्श के आधार पर कीटनाशक ले सकते हैं। इसमें फसल कितनी बड़ी है, उसे लगाए कितना समय हुआ और मिट्टी किस प्रकार की है। इस तरह की तमाम चीजें मायने रखती हैं। किसान कोई भी दुविधा होने पर विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर सकते हैं।
डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग