संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी, महासचिव कैप्टन अमरीक सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष फ्लाइंग ऑफिसर पूर्ण देव, उपाध्यक्ष इंस्पेक्टर कश्मीर सिंह तथा सचिव पूर्व सैनिक सुभाष कौंडल ने साझा बयान में कहा कि जाति और धर्म आधारित राजनीति ने भारत के टुकड़े कर दिए। कहा कि जाति आधारित राजनीति के चलते हिमाचल प्रदेश में ओबीसी वर्ग को सरकारी काॅलेजों और विश्वविद्यालयों में शून्य प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2019 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने ओबीसी वर्ग की 48 जातियों से उच्च शिक्षा का अधिकार छीन लिया। हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2019 में उच्च शिक्षण संस्थानों में 93वां संविधान संशोधन लागू नहीं किया लेकिन 103 वां संविधान संशोधन लागू कर दिया। परिणामस्वरूप वर्तमान में ओबीसी वर्ग को 0 % तथा सामान्य वर्ग को उच्च शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। सम्राट अशोक ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत में 23 विवि की स्थापना की थी। जिनमें से एक युनिवर्सिटी अफगानिस्तान कंधार में थी। सम्राट अशोक का मानना था कि मनुष्य की कोई जाति नहीं होती क्योंकि मनुष्य स्वयं एक जाति है। धर्म आधारित राजनीति करने के लिए नालंदा युनिवर्सिटी जला दी गई। जिसका निर्माण सम्राट अशोक ने किया था। यही नहीं सम्राट अशोक की ओर से स्थापित 84000 बौद्ध सपूत भी नष्ट कर दिए गए। धर्म और जाति की राजनीति के चलते नेपाल 1816 में तथा अफगानिस्तान 1879 ईस्वी में भारत से अलग हो गए।