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भगवान का आश्रय लेने से करोड़ों जन्मों के मिट जाते हैं पाप : अतुल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ऊना। हम सभी प्रभु के अंश होकर भी सुखी इसलिए नहीं हो पाते क्योंकि रुचि संसार में है। जिस दिन रुचि प्रभु की हो जाएगी, उस दिन हम परम सुख के स्वामी हो जाएंगे। अभी बस जितने से काम चल जाय, उतना ही प्रभु का सहारा ढूंढते हैं। श्री भक्तमाल कथा महोत्सव के समापन पर अतुल कृष्ण ने कम्युनिटी सेंटर ज्वार में कहा कि भगवान का आश्रय लेने से करोड़ों जन्मों के पाप-ताप एवं कल्मष मिट जाते हैं। जीव अविद्या से मुक्त होकर अपना तो भला करता ही है, जिन लोगों से ईश्वर अभी दूर हैं, उन्हें भी प्रभु से मिलाने में समर्थ हो जाता है। सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा को ढूंढने में परिश्रम नहीं है। संसार को उपलब्ध करने में ही मेहनत है। जिस मन से भगवान को खोजना चाहते हैं, वह मन भी तो उन्हीं का ही रूप है। गीता के दसवें अध्याय के बाइसवें श्लोक में भगवान स्वयं इस रहस्य को प्रकट कर रहे हैं। प्रभु में प्रेम हो जाना ही मनुष्य के समस्त पुरुषार्थों की सिद्धि है। हम भगवान को जानने का साधन नहीं करते तो स्वयं के साथ ही अन्याय कर रहे हैं। जिसने तन एवं मन को वश में कर लिया, वह संसार में यशस्वी एवं पूज्य हो जाता है।
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