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Una News: आरोपी सजा योग्य अपराधों से 12 साल बाद बरी

Wed, 24 Jun 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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ऊना। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत दो शाविक घई ने आरोपी सौरव को भारतीय दंड संहिता की धारा 401 के तहत सजा योग्य अपराधों से 12 साल बरी करने का फैसला सुनाया। आरोपी व्यक्ति ने पहले ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437-ए के आदेशानुसार व्यक्तिगत और ज़मानत बॉन्ड जमा कर दिए, जिसमें उसने वचन दिया है कि यदि कोई अपील दायर की जाती है और सुनवाई के लिए स्वीकार की जाती है तो वह तय समय के भीतर अपीलीय अदालत के सामने पेश होगा। बताया गया कि ट्रायल के दौरान एक अन्य आरोपी अनिल को आठ अप्रैल 2026 को घोषित अपराधी करार दिया गया था, इसलिए यह फैसला केवल आरोपी सौरव के संबंध में सुनाया जा रहा है। मामला यह है कि 12 अप्रैल 2014 को रात लगभग 9:45 बजे, शिकायतकर्ता महेंद्र अपनी दुकान बंद करके घर लौट रहे थे, तभी सुरेंद्र ने उन्हें बताया कि उसने दो लोगों को उनके घर के पास झाड़ियों में एक गैस कटर, एक बैग और एक ऑक्सीजन सिलिंलेंडर फेंकते हुए और उसके बाद एक निजी बैंक की ओर जाते हुए देखा था। जानकारी मिलने पर, शिकायतकर्ता सुरेंद्र के साथ उस जगह गए जहां सामान फेंका गया था और इसकी पुष्टि की। इसके बाद, उन लोगों की तलाश में निजी बैंक की ओर बढ़े। रास्ते में गांव के प्रधान शिव नाथ से मिले और उन सभी ने मिलकर तलाश जारी रखी। अभियोजन पक्ष का कहना है कि शिकायतकर्ता और अन्य ग्रामीणों ने निजी बैंक के पास दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। झाड़ियों में फेंके गए सामान के बारे में पूछे जाने पर, आरोपियों ने शुरू में कहा कि उन्होंने वह सामान ऊना से खरीदा था और वे कबाड़ का कारोबार शुरू करना चाहते थे। हालांकि, जब मौके पर और ग्रामीण जमा हुए और आगे पूछताछ की गई, तो आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनका इरादा बैंक में डकैती करने का था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मौके पर बुलाया गया। झाड़ियों में आरोपियों द्वारा कथित तौर पर फेंकी गई चीजों को जब्त किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी अनिल और सौरव के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में कई आपराधिक मामले दर्ज थे और इसके आधार पर आरोपी को आरोपों का दोषी ठहराने और सजा देने की मांग की गई है। दूसरी ओर, आरोपी के वकील का तर्क है कि आरोपी निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष के मामले की अन्य कमियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है और इसलिए आरोपी को बरी करने की मांग की। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को 12 गवाहों के बयान के आधार पर बरी कर दिया है।
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