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जिला अस्पताल में बनेगा शिशु पालना केंद्र

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ऊना। क्षेत्रीय अस्पताल परिसर ऊना में शिशु पालना केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके अंतर्गत एक निश्चित स्थान पर नवजात बच्चों के लिए झूला लगाया जाएगा। जिससे कोई भी माता-पिता विभिन्न कारणों से अपने नवजात बच्चे को इधर-उधर फेंकने या मारने के बजाए शिशु पालना केंद्र में लगे झूले में छोड़ सके। यह जानकारी एडीएम सुखदेव सिंह ने दी। एडीएम वीरवार को शिशु पालना योजना के तहत गठित कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिशु पालना योजना का मुख्य उद्देश्य समाज में ऐसे बच्चे जिन्हे मां-बाप शिशु को विभिन्न परिस्थितियों के कारण छोड़ देते हैं और कई बार ऐसे बच्चों की मौत तक हो जाती है। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक बच्चे को जीने का अधिकार प्राप्त है तथा ऐसी परिस्थितियों में पैदा हुए बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए शिशु पालना गृह स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे शिशु सुरक्षित रह सकें। उन्होंने बताया कि शिशु पालना योजना के अंतर्गत जब किसी बच्चे को शिशु पालना केंद्र में छोड़ दिया जाता है तो ऐसे बच्चे को केंद्र प्रभारी द्वारा प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने के उपरांत संबंधित जिले की बाल कल्याण समिति को सूचित किया जाता है। तदोपरांत समिति की ओर से बच्चे को हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित शिशु गृह शिमला को सौंप दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण परिषद हिमाचल को राज्य में विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी भी बनाया गया है, जो बच्चे की तब तक देखभाल करती है, जब तक कोई परिवार उस बच्चे को गोद न ले ले। इसके अतिरिक्त यह एजेंसी ऐसे परिवारों की खोज भी करती है जो उस बच्चे को गोद लेने के इच्छुक होते हैं। एडीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को क्षेत्रीय अस्पताल परिसर मेें शिशु पालना लगाने को लेकर उचित स्थान के जल्द चयन करने को लेकर निर्देश दिए, जिससे इस योजना को जल्द जिले में क्रियान्वित किया जा सके। बैठक में सीएमओ डॉ. प्रकाश दड़ोच, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष शांति शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस रंजीत सिंह, डॉ. एसके नंदा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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