रसूखदारों को आईआरडीपी में शामिल करने का आरोप
2002 के बाद नहीं हो पाया बीपीएल का सर्वेक्षण, जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा लाभ
पात्र लोगों को नहीं मिल रहा सरकार की योजनाओं का लाभ
जीएस जस्सल
थानाकलां (ऊना)।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से आईआरडीपी व पीडीएस का सर्वेक्षण घर-परिवार की स्थिति देखकर मौके पर जाकर करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीपीएल का मुकम्मल सर्वेक्षण 2002 के बाद नहीं हो पाया है। हर पांच वर्ष के बाद यह सर्वेक्षण पटवारी, सचिव व ग्राम सेवक घर-घर जाकर करते थे लेकिन 16 साल बीतने के बाद भी यह सर्वेक्षण नहीं हो पाया है। सर्वेक्षण 52 कालम के फार्म को भरने के बाद किया जाता है। इससे प्रत्येक परिवार की हकीकत आय पंचायत के सामने आ जाती है और आईआरडीपी में परिवार का चयन करने में पारदर्शिता आती है। जरूरतमंद लोगों का आरोप है कि पंचायतों के कोरम में आईआरडीपी का सही चुनाव नहीं हो पा रहा है। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल पा रहा है। आईआरडीपी की सूची में जो लोग शामिल किए जा रहे हैं, वे संपन्न लोग हैं और उनकी आय आईआरडीपी के लिए निर्धारित मापदंडों से कहीं अधिक है। स्थानीय लोगों जुल्फी राम, प्रवीण, राम किशन, जगदीश चंद, जोगिंद्र सिंह, सुरेंद्र, दीपक, अशोक, रणजीत, राज कुमार का आरोप है कि आईआरडीपी का सर्वेक्षण करने के लिए प्रशासन जो टीम भेजता है, वह मूकदर्शक बनी रहती है। आईआरडीपी की सूची में रसूखदार लोग आ रहे हैं। निर्धन परिवारों के लोग पंचायत के कोरम में न तो ऊंची आवाज में बोल पाते हैं और न ही आईआरडीपी की सूची में पहले से शामिल परिवार को कटवाने की सिफारिश करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का फायदा ऊंची पहुंच वाले लोगों को ही मिल रहा है। निर्धन लोग बदहाली में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि शीघ्र बीपीएल के सर्वेक्षण को कराया जाए ताकि पात्र लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।