लश्कर का बम गुरु अब्दुल करीम टुंडा तीन-चार साल पहले कांगड़ा जिले के नूरपुर उपमंडल के सदवां पंचायत में कपड़े की फेरी लगाया करता था। यह दावा सदवां के कुछ जिम्मेदार नागरिकों ने किया है।
पूर्व पंचायत प्रधान प्रताप शुक्ला, उपप्रधान राजेश टोनी, वार्ड सदस्य पिंकी शर्मा, राजेश शर्मा व जोगिन्द्र सिंह का दावा है कि टुंडा सदवां पंचायत के वार्ड छह में एक मकान में किराये पर रहता था, जो कि किसी बसोली (जम्मू) निवासी का है।
पड़ोसियों ने बताया कि मकान मालिक कभी-कभी शाम को सदवां आता है और एकाध दिन रुककर वापस चला जाता है।
जबकि टुंडा के साथ कपड़े की फेरी लगाने वाले कई अन्य साथी अभी भी सदवां व इसके आसपास के इलाकों में फेरी लगाने का काम कर रहे हैं।
बीते दिनों अचानक टुंडा की गिरप्तारी के बाद अखबारों व टीवी चैनलों में प्रसारित उसकी तस्वीरों को देखकर सदवां के लोग सदमें में हैं।
उन्हें अब भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा कि लश्कर का खूंखार आतंकी टुंडा करीब एक-डेढ साल उनके बीच गुजार चुका है।
प्रताप शुक्ला का दावा है कि जब टुंडा पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया तो उसके अगले दिन से वह इलाके में दिखाई नहीं दिया। वह कपड़े की फेरी लगाने के साथ-साथ आम का भी व्यापार किया करता था।
अब लोगों को इस बात की आशंका है कि टुंडा के दूसरे साथी भी फेरी लगाने वालों के वेश में इधर-उधर न घूम रहे हों। अब्दुल करीम टुंडा ने भी खुद हिमाचल में रहने और यहां बम बनाने की ट्रेनिंग देने की बात कबूली है।
इससे पहले यह बात किसी ने पुलिस-प्रशासन को नहीं बताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी गहन तफ्तीश की जाएगी।
राजीव अत्री, डीएसपी, नूरपुर