जोनल अस्पताल में जन औषधि केंद्र दोबारा शुरू होगा। रेडक्रॉस संस्था इस केंद्र को चलाकर रोगियों को बाजार से 30-40 फीसदी सस्ती दवाएं मुहैया करवाएगी। वर्तमान में जनऔषधी केंद्र के माध्यम से जोनल अस्पताल में रोगियों को बेहद सस्ती दवाएं उपलब्ध करवाने की योजना ठप पड़ी है। ऐेसे में रोगियों को केंद्र सरकार की इस योजना से वंचित रहना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल परिसर में तीन एजेंसियां के माध्यम से 10 से 15 फीसदी तक सस्ती दवाएं रोगियों को उपलब्ध करवाने की दुकानें चल रही हैं लेकिन जन औषधि केंद्रों में इससे कहीं अधिक सस्ती दरों पर दवाएं मिलने का प्रावधान है।
रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं उपायुक्त सोलन डॉ. राकेश कंवर ने रेडक्रास को जन औषधि केंद्र सौंपने की कवायद शुरू कर दी है। जल्द इस पर अमलीजामा पहनाया जा सकता है। आरकेएस के द्वारा लिए टेंडर वापस ले लिए हैं। अस्पताल प्रशासन और आरकेएस की तमाम कोशिशों के बावजूद जन औषधि केंद्र को बहाल करने की कवायद विफल रही। इसे देखते हुए रेडक्रास द्वारा इसे संचालित करने का फैसला लिया है। यह जन औषधि केंद्र वर्ष 2011 में खोला था। लेकिन अस्पताल परिसर और इसके बाहर दवा की दुकानों के कंपीटीशन के बीच काफी सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध करवाने वाला जन औषधि केंद्र गायब हो चुका है। जोनल अस्पताल सोलन में अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 नए और पुराने मरीजों की ओपीडी है।
103 प्रकार की दवाओं का प्रावधान
जन औषधि केंद्र में जैनेरिक दवाओं की उपलब्धता होती है। करीब 103 प्रकार की दवाएं इन केंद्रों में मिलती हैं। कुछ दवाओं में तो 40 से 90 फीसदी तक की छूट का प्रावधान रहता है। लेकिन दवाएं न मिलने से रोगियों को बाहर निजी दुकानों या अस्पताल में मौजूद आउटलेट पर बाजार या उससे थोड़े से कम दामों में दवा खरीदनी पड़ रही है। लिहाजा अब रेडक्रास संस्था इस केंद्र को चलाएगी। इस तरह से कार्य करता है केंद्र जन औषधि केंद्र को सेटअप आरकेएस द्वारा किया जाता है। टेंडर फ्लोट करने के बाद सबसे कम कीमत भरने वाले फार्मासिस्ट के सपुर्द केंद्र होगा। दवाओं की खरीद आरकेएस के माध्यम से पब्लिक सर्विस यूनिट करती है। फार्मासिस्ट को दवा की कमीशन मिलती है। यह दवाएं बाजार से काफी सस्ती कीमतों पर उपलब्ध करवाई जाती हैं। अब रेडक्रास के शिक्षित और बेहतर प्रबंधन के साथ इस केंद्र को चलाया जाएगा।
इसलिए बंद हुआ केंद्र
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक दवाओं की काफी वैरायटी है। दवाओं की भारी डिमांड को पूरा करने में संचालक विफल रहा। कस्टमर की डिमांड पूरी नहीं हो सकी। इससे केंद्र कुछ खास काम नहीं कर सका। संचालक की कमीशन भी काफी प्रभावित हुई। इसके चलते जन औषधि केंद्र को बंद करके संबंधित संचालक कहीं चला गया।
एक लाख 20 हजार की दवाएं
तालाबंदी होने से कुछ समय पहले जन औषधि केंद्र में रखी करीब सवा लाख की दवाएं खराब हुई थी। यह दवा आरकेएस के तहत खरीद थी। इससे काफी नुकसान झेलना पड़ा। केंद्र को खोलकर कुछ दवाओं को जिला के पीएचसी या सीएचसी में सप्लाई किया गया। शेष को डिस्पोज आफ करना पड़ा। इसके बाद इस केंद्र को खोलने की कवायद फिर शुरू हुई लेकिन यह सफल नहीं हो सकी।
रेडक्रास संस्था चलाएगी केंद्र : सीएमओ
सीएमओ डॉ. आरके दरोच ने कहा कि जन औषधि केंद्र को रेडक्रास द्वारा संचालित किया जाएगा। सस्ती दवाओं से रोगियों को फायदा होगा। अस्पताल में बंद पड़े केंद्र को खोलने की दोबारा कोशिश की जा रही है। हाल ही में आयोजित आरकेएस की बैठक में इस पर मुहर लग चुकी है। आरकेएस द्वारा फ्लोट् किए टेंडर वापस ले लिए हैं।