नौणी विवि में कार्यशाला के दौरान लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए। स्रोत: नौणी विवि
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि में सतत एवं लचीली कृषि के लिए प्राकृतिक खेती आधारित बीज उत्पादन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में चंबा, मंडी, सिरमौर, हमीरपुर, शिमला और सोलन जिलों से किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) के लगभग 200 किसानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त बीज संरक्षण से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, आईसीएआर-एनबीपीजीआर शिमला और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे। इस मौके पर कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि बीज कृषि की आधारशिला हैं और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की कुंजी भी। प्राकृतिक खेती में बीज स्वायत्तता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के बीजों का स्वामित्व और नियंत्रण किसानों के पास ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सौभाग्यशाली है कि यहां अभी भी ऐसे किसान हैं जिनके पास देसी बीजों का पारंपरिक ज्ञान उपलब्ध है। इस ज्ञान का समुचित उपयोग कर देसी बीज किस्मों का व्यवस्थित संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।