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कृषि के बेहतर मॉडल पर सोचने की जरुरत : देविंद्र

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नौणी विवि में कृषि आय बढ़ाने के लिए खाद्य प्रणालियों को बदलने पर मंथन
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प्रदेश और बाहरी राज्यों के 70 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि में कृषि आय बढ़ाने के लिए खाद्य प्रणालियों को बदलने और कृषि पारिस्थितिकी में परिवर्तन पर चर्चा के लिए कार्यशाला हुई। इसमें दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब और उत्तराखंड के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने विवि में कंसोर्टियम फॉर एग्रो इकोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन (सीएटी), उत्तरी क्षेत्र के लिए कृषि पारिस्थितिकी के माध्यम से परिवर्तनकारी मार्गों के लिए प्रणालीगत परिवर्तन के बारे में मंथन किया।
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सम्मेलन का आयोजन कैट की ओर से नौणी विवि और जीआईजेड इंडिया के संयुक्त सहयोग से किया गया। इस आयोजन के साझेदारों में इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव, भारत एग्रोइकोलॉजी फंड, सीईईडब्ल्यू, खेती विरासत मिशन, हिम आरआरए नेटवर्क और अन्य शामिल रहे। पहले सत्र में खाद्य नीति विशेषज्ञ देविंद्र शर्मा ने कहा कि हमें बड़े पैमाने पर कृषि पारिस्थितिकी को अपनाने के महत्व पर जोर देना चाहिए। इसके लिए कृषि के बेहतर मॉडल के बारे में सोचने की जरूरत है। कृषि के लिए अधिक बजट आवंटित करने और उपभोक्ताओं की ओर से भुगतान की जाने वाली कीमत में किसानों की हिस्सेदारी को अधिकतम करने की सख्त आवश्यकता है।
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इस मौके पर विवि कुलपति प्रो. राजेश्वर एस चंदेल ने कृषक समुदाय, उपभोक्ता स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए प्राकृतिक खेती के कई लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थानों और नागरिक समाज के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई राष्ट्रीय और राज्य कार्यक्रमों का उपयोग किया जा सकता है।
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