बद्दी (सोलन)। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के तहत अब उद्योगों में कार्यरत और अधिक कामगार कर्मचारी राज्य बीमा के दायरे में आएंगे। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कामगार पहले ईएसआई में कवर था, लेकिन वेतन बढ़ने के कारण इसकी निर्धारित सीमा से बाहर हो गया था, तो अब दोबारा ईएसआई के दायरे में आने पर उसे वे सभी अधिकार और लाभ मिलेंगे जो बाहर होने वाले दिन देय थे।
चैंबर ऑफ कॉमर्स हिमाचल प्रदेश के कानूनी सलाहकार देवव्रत यादव ने बताया कि नए लेबर कोड के आने से कामगारों को बड़ी राहत मिली है। जितने दिन कोई कामगार ईएसआई की व्याप्ति से बाहर रहा है, कर्मचारी राज्य बीमा निगम उस पूरी अवधि को नियमित सेवा अवधि मानेगा। नए लेबर कोड के नियमों के तहत, जब कोई कामगार दोबारा इस निगम के दायरे में आता है, तो उसे और उसके पूरे परिवार को पहले ही दिन से अति विशिष्ट उपचार (सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट) जैसी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। सामान्य तौर पर, उद्योग में कार्यरत कामगार जब पहली बार भी ईएसआई में पंजीकृत होता है, तो उसे और उसके परिवार को निगम की ओर से सभी देय लाभ पहले दिन से ही मिलने लगते हैं।
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अंशदान की कटौती के नियमों में बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड के कारण ईएसआईसी अंशदान की कटौती के नियमों को भी बदल दिया गया है। अब कामगारों के अंशदान की कटौती केवल मूल वेतन महंगाई भत्ता और रिटेनरशिप भत्ते पर ही की जाएगी। इससे पहले ईएसआई की कटौती कर्मचारी के कुल मासिक ग्रॉस वेतन पर की जाती थी। अंशदान के इस नए फॉर्मूले की वजह से अब पहले से कहीं अधिक संख्या में कामगार ईएसआई योजना की व्याप्ति (कवरेज) के अंतर्गत आ सकेंगे।