नागरिक चिकित्सालय अर्की में डाक्टर की कुर्सी पर बैठा बच्चा। स्रोत:जागरूक पाठक
अर्की(सोलन)। नागरिक चिकित्सालय अर्की में इन दिनों डॉक्टरों की जगह या तो स्टाफ कर्मियों के बच्चे कुर्सियों में बैठे रहते हैं या फिर कुर्सियां खाली रहती हैं। जबकि मरीज उन्हें ढूंढते हुए परेशान होते हैं।
बुधवार को भी अस्पताल में कुछ इसी तरह के हालात दिखे, जब खनलग पंचायत कि एक महिला बस स्टैंड के समीप बेहोश हो गई। आसपास के लोगों ने उसे आपातकाल में अस्पताल पहुंचाया लेकिन जब वह अस्पताल पहुंचे तो उन्हें यहां पर डॉक्टर ही नहीं मिले। इस दौरान जब स्टॉफ कर्मियों से डॉक्टरों के बारे में पूछा तो वह कभी पहली मंजिल तो कभी दूसरी मंजिल में भेजते रहे। इस दौरान जब ओपीडी में देखा तो वहां पर डॉक्टरों के बजाय अस्पताल कर्मचारियों के बच्चे चिकित्सकों की कुर्सी पर बैठे नजर आए। आरोप है कि काफी देर बाद जब चिकित्सक मिले तो मरीज और डॉक्टरों में बहस हो गई और डॉक्टरों ने इलाज से पहले पुलिस वेरिफिकेशन करवाने की बात कही। हालांकि जब बात बढ़ने लगी तो डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया।
गौर रहे कि करोड़ों रुपये की लागत से बने अर्की के नागरिक अस्पताल की तीसरी मंजिल इमरजेंसी बनाई गई है। यही वजह है कि अभी तक कई लोग इमरजेंसी तक पहुंचने से पहले दम तोड़ चुके हैं। वहीं मरीजों को तीसरी मंजिल पर पहुंचाना भी तीमारदारों के लिए मुश्किल भरा होता है।
उधर, इस बारे बीएमओ डॉ ताराचंद नेगी ने कहा कि वह कहीं बाहर हैं और चिकित्सक क्यों नहीं अपनी सीट पर बैठे थे, इस बारे में पूछताछ की जाएगी।