एसएमएस के माध्यम से कृषि समस्याओं के निदान और जानकारी देने की योजना को आधा अधूरा लांच कर दिया गया। यह योजना कागजों में तो चल रही है, लेकिन हकीकत में नहीं। हैरत की बात है कि जिस सॉफ्टवेयर के आधार पर यह योजना शुरू होनी थी, वह सॉफ्टवेयर ही तैयार नहीं है। 1 नवंबर को बिना सॉफ्टवेयर के ही प्रदेश में इस योजना को शुरू कर दिया गया।
प्रदेश के किसानों को घर बैठे ही कृषि से जुड़ी तमाम जानकारियां उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शुरू की गई एसएमएस योजना को लांच किए एक माह से भी ज्यादा समय हो चुका है। बावजूद इसके, किसान इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। कृषि के क्षेत्र में सेवाओं के महत्व पर इस पायलट परियोजना को शुरू किया गया है, जिसमें किसान अपने खेतों में फसलों के पैदावार में आ रही मुश्किलों का समाधान फोन के माध्यम से कर सकते हैं।
समस्या जटिल होने पर किसान कृषि समस्या की फोटो खींचकर एसएमएम के माध्यम से वैज्ञानिकों को भेज सकते हैं। यह भी इसमें प्रावधान है। इसके बाद अधिकारियों द्वारा अपनी राय देकर समस्या का समाधान किया जाना है, लेकिन सॉफ्टवेयर न होने के कारण यह योजना अधूरी पड़ी है।
जिला के प्रत्येक विकास खंडों में तैनात कृषि विकास अधिकारियों को इससे जोड़ा गया है। इन्हें इस योजना के तहत एक सॉफ्टवेयर मुहैया करवाए जाएगा। किसानों को यह फोन नंबर जारी किए जाएंगे। यह सॉफ्टवेयर पोर्टल से जुड़ा होगा। जब एसएमएस आएगा तो वह पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों तक पहुंचेगा और कृषि समस्याओं का निदान होगा। इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. वाईपी शर्मा ने बताया कि योजना को लांच हुए एक माह से भी ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी सॉफ्टवेयर पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है। इसमें कई तकनीकी जानकारियों को डाला जाना शेष है, जिसमें एक माह से अधिक का समय लग सकता है। उन्होंने माना कि एक नवंबर को योजना लांच की जा चुकी है।