शहर में पानी की सप्लाई की व्यवस्था को लेकर नगर परिषद और आईपीएच सोलन अभी तक गंभीर नजर नहीं आता। अफसरशाही इतनी असंवेदनशील हो चुकी है कि पानी के मामले में जेल तक की हवा खाने के बावजूद सरकारी तंत्र नहीं सुधरा। आलम यह है कि पीलिया फैलने के बाद कोर्ट और सरकार के पानी के स्टोरेज टैंकों को खाली करके उन्हें साफ करने के आदेशों पर सोलन शहर में अभी तक अमल नहीं किया गया है।
शहर को पेयजल सप्लाई करने वाले मुख्य 18 लाख गैलन पानी के टैंक की सफाई नहीं की है। टैंक कब साफ हुआ इसका रिकार्ड नप जिला प्रशासन को दिखाने में नाकाम रही है। यह पीने के पानी का टैंक पूरी तरह से कब साफ हुआ, इस तथ्य से सब बेखबर हैं। उधर पूर्व मनोनीत पार्षदों का दावा है कि यह टैंक डेढ़ दशक से साफ नहीं किया गया। आईपीएच विभाग भी मूक दर्शक बना बैठा है। हालांकि अन्य दो बिना छत के स्टोरेज टैंकों की सफाई की गई है। लेकिन खुले में वह टैंक किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे रहे हैं। लिहाजा सोलन की जनता को नगर परिषद कैसा पानी सप्लाई कर रही है, इसका अंदाजा नप के अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये में साफ झलक रहा है। स्थानीय प्रशासन के साथ की गई ,अमर उजाला, की पड़ताल में मुख्य टैंक की सफाई न होने के हैरत करने वाले तथ्य उभरकर सामने आए हैं।
पाठकों ने साझा की सूचना
जनवरी-फरवरी माह में पीलिया फैलने के बाद निर्देशों पर अमल करते हुए सोलन टैंक रोड पर दो छोटे पानी के टैंकों की सफाई तो कर दी गई, लेकिन सबसे बड़े और अहम 18 लाख गैलन वाले स्टोरेज टैंक को साफ नहीं किया गया। इस टैंक में गिरी और अश्वनी की पानी की सप्लाई एकत्र होती है। एक जिम्मेदार पाठक ने फोन करके इस पर सवाल उठाए। इसके बाद ,अमर उजाला, की टीम ने इस मामले की पड़ताल शुरू की।
लाइव : पड़ताल
स्थान : टैंक रोड सोलन
समय 11.30 बजे। 8 लाख और 12 लाख गैलन के दो पानी के टैंक बिना छत के ही पड़े हैं। खुले में पीने का पानी स्टोर हो रहा है। यहां कोई भी जंगली जानवर या कोई आदमी आसानी से घुस सकता है। थोड़ा ऊपर चढ़ने पर 18 लाख गैलन पानी का स्टोरेज टैंक है। सरकार और कोर्ट के निर्देशानुसार टैंकों में सफाई की डेट और ड्यू डेट अंकित होना अनिवार्य है। लेकिन यहां कुछ नहीं। मौके पर सूचना जेई और नप अध्यक्ष को दी गई। पूछा गया कि कब सफाई हुई? जवाब मिला कि नप की बुक में रिकार्ड मिलेगा? वहां देखें।
नप कार्यालय की लिपिकीय ब्रांच
समय: 12.10 बजे। एक बैठे अधेड़ व्यक्ति से जब रिकार्ड के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि यहां तो विजिलेंस रिकार्ड नहीं ढूंढ पाई आप क्या ढूंढेंगे? साथ ही तब वहां पूछताछ की गई तो जानकारी मिली की शायद यह टैंक बनने के बाद कभी साफ हुआ हो। सूचना डीसी सोलन को दी गई।
पड़ताल: डीसी सोलन डा राकेश कंवर
स्थान 12.25 बजे। टैंक की सफाई की हकीकत खुद डीसी सोलन के सामने कुछ इस तरह से आई। डीसी डा. राकेश कंवर से जब जानकारी साझा की गई तो उन्होंने नप के ईओ को तुरंत फोन करके रिकार्ड बुक तलब की जिसमें 18 लाख गैलन पानी के मुख्य स्टोरेज टैंक की सफाई का रिकार्ड हो। नप अधिकारी ने कहा कि इसका रिकार्ड नप के पास नहीं है? मइशर बुक में यह सफाई इंगित नहीं हुई है। डीसी को बताया कि आईपीएच विभाग को पानी की सप्लाई बंद करने के लिए कहा था। इसके लिए पत्र भी लिखे लेकिन ऐसा नहीं हुआ, लिहाजा टैंक को अंदर से साफ नहीं किया है। पता नहीं अंतिम बार टैंक कब साफ हुआ।
48 घंटे के भीतर सफाई शुरू करने के आर्डर: डीसी
डीसी राकेश कंवर ने कहा कि 48 घंटे के भीतर स्टोरेज टैंक के सफाई के स्टैंडिंग आर्डर निकाल दिए हैं। उन्होंने अधिशासी अभियंता को फोन करके निर्देश दिए कि 48 घंटों के भीतर स्टोरेज टैंक को खाली किया जाए। नप को आर्डर दिए कि त्योहारों से पहले इस टैंक को पूरी तरह से साफ करके दोबारा से भरा जाए।
नहीं तो नप और आईपीएच जिम्मेवार
प्रशासन ने अपने स्टैंडिंग आर्डर में नप और आईपीएच को तुरंत टैंक के सफाई के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि टैंक साफ नहीं हुए और कोई अनहोनी हुई तो जिम्मेवार नप और आईपीएच के अधिकारी होंगे।
ध्यान से पानी का करें प्रयोग
टैंक की सफाई के निर्देशों पर मंगलवार से अमल होना शुरू हो सकता है। लिहाजा पानी कि किल्लत गहराने के आसार हैं। संबंधित विभागों ने सोच समझ कर पानी का इस्तेमाल करने के निर्देश किए हैं। बड़े टैंक में गिरि और अश्वनी का पानी भरने के बाद पानी को दो खुले टैंकों में छोड़ा जाता है।