पुणे स्थित राष्ट्रीय लैब में अश्वनी के ट्रीटेड और अनट्रीटेड पानी के सैंपल पास हो चुके हैं। इसके बावजूद अश्वनी से पानी की सप्लाई को बहाल करने का रिस्क न तो प्रशासन ले रहा है न ही आईपीएच। ऐसे में सोलन शहर में पानी के पानी की किल्लत विकराल हो गई है।
शहर को फीड करने वाली गिरि योजना से डिमांड के अनुरूप महज 20 फीसदी सप्लाई ही मिल रही है। 75 फीसदी पानी की कटौती का दंश झेल रहे लोगों के लिए पानी की भयंकर समस्या से जूझना पड़ रहा है।
लोगों ने जिला प्रशासन, आईपीएच और नगर परिषद से बेहतर समन्वय स्थापित करके पेयजल सप्लाई को बहाल करने की मांग की है। उधर स्कूलों से लेकर व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ता पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
सोमवार को 6 एमएलडी पानी
सोमवार को सोलन में करीब 6 एमलएलडी पानी की सप्लाई हुई। निगम के अभियंता बीएस ठाकुर के मुताबिक वर्तमान में शहर में करीब 35 से 36 एमलएलडी पानी की सप्लाई जरूरी है। ऐसे में जितना पानी आ रहा है, आपात स्थिति के लिए स्टॉक बचाने के बाद उतना ही लोगों को मुहैया करवाया जा चुका है।
कई जगह पांच दिन
से नहीं पहुंचा पानी
शहर के कई 3, 9, 6, 7 आदि वार्डों में पिछले पांच दिन से पानी नहीं आया है। बसाल, रबौण, आंजी, सपरूण आदि में भी पानी की किल्लत से लोग बेहाल हैं। ऐसे में पेयजल व्यवस्था के खिलाफ लोग लामबंद होने लगे हैं।
एक लाख की आबादी प्रभावित
शहर में करीब एक लाख की आबादी पेयजल किल्लत से जूझ रही है। अधिकांश क्षेत्रों में पानी नहीं है। लोगों के लिए अश्वनी और गिरि के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। ऐसे में 60 करोड़ से अधिक खर्च करके शहर की आपूर्ति को बेहतर बनाने वाली गिरि भी लोगों के किस काम नहीं आ रही है।
नान पाटेबल वाटर के टैंकर के रेट तय नहीं
पीने के अलावा अन्य चीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी (नान पाटेबल) के लिए लोग टैंकरों पर निर्धारित हैं। लेकिन टैंकरों के पानी के रेट निर्धारित नहीं है। विभागीय तर्क है कि आईपीएच की पालिसी के मुताबिक प्राइवेट टैंकरों के पीने के सप्लाई की मनाही है। लिहाजा रेट निर्धारित करने में दिक्कत है।
जितनी सप्लाई आएगी उतनी ही देंगे : नप
नगर परिषद अध्यक्ष पवन गुप्ता का कहना है कि आईपीएच गिरि से पानी की सप्लाई न के बराबर दे रहा है। सोमवार को छह एमएलडी पानी की सप्लाई मिली है। बीस फीसदी भी आपूर्ति नहीं हुई है। ऐसे में जितनी पानी की सप्लाई होगी उतनी ही लोगों को मिलेगी।
तीखे सवाल
डीसी राकेश कंवर
01-सवाल: क्या राष्ट्रीय लैब से अश्वनी के ट्रीटेड और नान ट्रीटेेड पानी के क्या सैंपल पास हो चुके हैं?
जवाब: हां अश्वनी के ट्रीटेड और नान ट्रीटेड पानी के सैंपल राष्ट्रीय लैब में पास हो चुके हैं। इसमें पीलिया का वायरस नहीं पाया गया है।
02- सवाल: पेयजल किल्लत को देखते हुए फिर अश्वनी को बहाल क्यों नहीं किया जा रहा?
जवाब: यह निर्णय सरकार द्वारा लिया जाना है। प्रशासन सरकारी निर्देशों को ही फालो करेगा। अभी निर्देश हैं कि रूटीन में सैंपल की टेस्टिंग करवाओ। वह करवाई जा रही है।
03- सवाल: कब तक पानी की समस्या दूर हो सकती है? 20 फीसदी भी आपूर्ति नहीं है।
जवाब: बिलकुल सही है। पानी की समस्या काफी अधिक पैदा हो चुकी है। सरकारी निर्देशों के बाद दो तीन दिन में अश्वनी के पानी की रिपोर्ट लैब से आ जाएगा। सरकारी निर्देश जो होंगे उस पर अमल होगा।
04- सवाल: क्या अश्वनी और गिरि के अलावा शहर व गांवों के फीड करने का कोई विकल्प नहीं है।
उत्तर: विकल्प होना बेहद जरूरी है। अश्वनी बंद है। गिरि से भी सप्लाई बेहद कम हो चुकी है। आईपीएच विभाग को वैकल्पिक संभावनाए तलाशने के निर्देश दिए हैं। जिससे भविष्य में इस तरह की समस्या न हो।
05- सवाल : निजी तौर पर मंगवाए जाने वाले पानी के टैंकरों के रेट निर्धारति क्यों नहीं है?
जवाब : निजी तौर पर मंगवाए जाने वाले टैंकरों का आईपीएच पालिसी में विधान शायद नही है। पानी का सोर्स क्या है। सप्लाई पानी की गुणवत्ता कैसी है, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती। लिहाजा निजी तौर पर टैंकर आदि की दरें तय नहीं की जा सकती।