शिमला से सोलन लाया गया वाहन भी नहीं हुआ कामयाब, वापस भेजा
सोलन पहुंचने के बाद सिर्फ एक सप्ताह में ही खड़ा हो गया था वाहन
संकरी गलियों के लिए लाए गए ई-रिक्शा भी पार्किंग के स्टोर में बने कबाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर को चकाचक करने और सफाई व्यवस्था को डिजिटल-आधुनिक रूप देने के नाम पर जनता के लाखों रुपयों की किस कदर बर्बादी होती है, इसका जीता-जागता नमूना सोलन नगर निगम में देखने को मिल रहा है। जो वाहन शहर की सड़कों और संकरी गलियों से कूड़ा उठाकर स्वच्छता का पाठ पढ़ाने आए थे, वे आज खुद ही नगर निगम की पार्किंग में कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं।
इसके अलावा हाल ही में शिमला से सोलन लाया गया विशेष सफाई वाहन भी निगम की इस नाकामी की भेंट चढ़ गया। बड़ी उम्मीदों के साथ सोलन लाया गया यह वाहन महज एक सप्ताह भी सड़कों पर सही से नहीं चल पाया। तकनीकी खामियों या योजना के अभाव में इसे सप्ताह भर में ही खड़ा कर दिया गया और अब इसे वापस शिमला भेज दिया गया। वाहनों की बर्बादी की यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। शहर की तंग और संकरी गलियों से घर-घर कूड़ा उठाने की मंशा से खरीदे गए ई-रिक्शा की हालत भी बेहद दयनीय है। जिस समय ये ई-रिक्शा खरीदे गए थे, तब दावा किया गया था कि इससे शहर के दूरदराज और तंग इलाकों में सफाई व्यवस्था सुगम होगी। लेकिन हकीकत यह है कि ये ई-रिक्शा पार्किंग के स्टोर रूम में सड़ रहे हैं और कबाड़ का रूप ले चुके हैं।
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लाखों के बजट पर फिरा पानी, जवाबदेही तय नहीं
सफाई के नाम पर आई इन गाड़ियों और ई-रिक्शा पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन बिना दूरदर्शिता और ठोस रणनीति के शुरू की गई योजनाओं का खामियाजा अब शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। एक तरफ जहां शहर की सड़कों पर जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर सफाई के लिए खरीदे गए उपकरण और गाड़ियां स्टोर में बंद पड़े-पड़े सड़ रही हैं। स्थानीय लोगों में प्रशासन की इस लापरवाही और सरकारी पैसे की बर्बादी को लेकर भारी रोष है।